Mithilesh Yadav
28 Nov 2025
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसी दिन कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इस दिव्य घटना की याद में हर वर्ष गीता जयंती मनाई जाती है।
गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू पर मार्गदर्शन देने वाली अद्भुत शिक्षाओं का संग्रह है। 5,000 साल पहले कही गई बातें आज भी उतनी ही प्रभावी और सार्थक हैं। इसलिए गीता जयंती मनाने का उद्देश्य केवल पूजा नहीं, बल्कि उसके संदेशों को जीवन में अपनाना है।
इस वर्ष गीता जयंती 1 दिसंबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी। इसी दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा, जो इस तिथि को और पावन बनाता है।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 30 नवंबर 2025, रात 9:29 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 1 दिसंबर 2025, शाम 7:01 बजे
“वसुदेव सुतं देवं कंस चाणूर मर्दनम्,
देवकी परमानंदं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम।”
इसके बाद गीता का संपूर्ण पाठ करें या केवल अध्याय 11 का पाठ भी कर सकते हैं, जिसे सबसे शक्तिशाली माना गया है। अंत में गीता की आरती करें और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
माना जाता है कि इस दिन गीता का पाठ करने से- जीवन में शांति मिलती है, मन की उलझनें दूर होती हैं, ज्ञान बढ़ता है और अंततः मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। जो लोग जीवन की समस्याओं, तनाव और भ्रम से जूझ रहे हों, उनके लिए गीता के श्लोक मार्गदर्शन का काम करते हैं। गीता के उपदेश तभी असर करते हैं जब मन उतना ही शांत और ग्रहणशील हो जाए, जितना अर्जुन ने युद्धभूमि पर किया था।