Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

AI डीपफेक पर सख्त हुए गौतम गंभीर :दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे, फर्जी वीडियो पर रोक की मांग

गौतम गंभीर ने AI डीपफेक और फर्जी वीडियो के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने बिना अनुमति नाम, चेहरा और आवाज के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। सोशल मीडिया पर वायरल फर्जी कंटेंट को हटाने और 2.5 करोड़ हर्जाने की भी अपील की गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे, फर्जी वीडियो पर रोक की मांग
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में एक सिविल केस दायर कर डीपफेक और डिजिटल नकल पर रोक लगाने की मांग की है। गंभीर का कहना है कि सोशल मीडिया पर उनके नाम, चेहरे और आवाज का बिना अनुमति इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे फर्जी और भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। यह मामला अब तेजी से चर्चा में आ गया है और डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

    ये भी पढ़ें: CM के जाते ही मची लूट ! नीतीश के कार्यक्रम के बाद मुंगेर में हंगामा, अफसर भी सब्जियां लेते दिखे

    फर्जी वीडियो और अकाउंट्स से बढ़ी चिंता

    गंभीर की लीगल टीम के अनुसार, 2025 के अंत से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और फेसबुक पर उनके नाम से फर्जी कंटेंट तेजी से बढ़ा है। एआई तकनीक की मदद से फेस-स्वैप और वॉइस-क्लोनिंग का इस्तेमाल कर ऐसे वीडियो बनाए गए, जिनमें उन्हें ऐसे बयान देते दिखाया गया जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं। इनमें एक वीडियो ऐसा भी था, जिसमें उनके इस्तीफे की झूठी खबर दिखाई गई। यह वीडियो लाखों बार देखा गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

    बड़ी कंपनियों को भी बनाया पक्ष

    इस मामले में गंभीर ने कुल 16 पक्षों को प्रतिवादी बनाया है। इसमें कई सोशल मीडिया अकाउंट्स के साथ बड़ी टेक कंपनियां भी शामिल हैं। Amazon, Flipkart, Meta Platforms, Google और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म का नाम इस केस में शामिल किया गया है। इसके अलावा, आईटी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी इस मामले में शामिल किया गया है ताकि अदालत के आदेशों को सही तरीके से लागू किया जा सके।

    ये भी पढ़ें: World Record : रोनाल्डो से भी कम मैचों में लियोनेल मेसी ने दागा करियर का 900वां गोल

    2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग

    गंभीर ने कोर्ट से 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सभी फर्जी अकाउंट्स और आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने और भविष्य में इस तरह के इस्तेमाल पर स्थायी रोक लगाने की अपील की है। यह केस कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेड मार्क्स एक्ट 1999 और कॉमर्शियल एक्ट 2015 के तहत दायर किया गया है। इसमें पहले दिए गए कई बड़े फैसलों का भी हवाला दिया गया है, जिनमें पर्सनैलिटी राइट्स को कानूनी सुरक्षा दी गई है।

    सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बड़ा मुद्दा

    गंभीर ने कहा कि यह मामला सिर्फ उनकी छवि का नहीं है, बल्कि यह हर सार्वजनिक व्यक्ति के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि एआई के इस दौर में किसी की पहचान का गलत इस्तेमाल करना एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। उनका मानना है कि अगर समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसे मामलों में और तेजी आ सकती है।

    डीपफेक क्या है?

    डीपफेक एक ऐसी तकनीक है, जिसमें एआई की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा या आवाज बदलकर नकली वीडियो या ऑडियो तैयार किया जाता है। यह देखने में बिल्कुल असली जैसा लगता है, जिससे आम लोगों के लिए सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

    बढ़ते खतरे पर चिंता

    भारत में हाल के समय में डीपफेक मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। खासकर सोशल मीडिया पर इसका दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है। कई मामलों में इसका इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, छवि खराब करने और आर्थिक लाभ के लिए किया जाता है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

    Latest Posts