Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

भोपाल:गैस संकट के बीच 15 अप्रैल से शादी सीजन शुरू, वैवाहिक आयोजनों पर पड़ा असर

15 अप्रैल से एक बार फिर शादी-विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू होने जा रहे हैं, लेकिन शहर में जारी रसोई गैस की किल्लत ने तैयारियों पर असर डाल दिया है। हालात ऐसे हैं कि जहां पहले शादी के कार्यक्रम कई दिनों तक चलते थे, वहीं अब उन्हें एक दिन में समेटा जा रहा है।
गैस संकट के बीच 15 अप्रैल से शादी सीजन शुरू, वैवाहिक आयोजनों पर पड़ा असर
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मनोज चौरसिया, भोपाल 

    गैस की कमी ने शादी-विवाह जैसे बड़े आयोजनों की तस्वीर बदल दी है। जहां पहले भव्य आयोजन होते थे, अब सीमित संसाधनों में काम चलाया जा रहा है। अगर जल्द ही गैस सप्लाई में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

    गैस की कमी से बदली शादी की परंपरा

    रसोई गैस की किल्लत का असर सीधे वैवाहिक आयोजनों पर दिखाई देने लगा है। जहां पहले हल्दी, मेहंदी और संगीत जैसे कार्यक्रम तीन-तीन दिन तक चलते थे, अब परिवार इन्हें एक ही दिन में निपटा रहे हैं। परिवारों को चिंता है कि गैस की कमी के कारण कहीं मेहमानों के सामने व्यवस्था कमजोर न पड़ जाए, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

    ये भी पढ़ें: वाराणसी: काशी में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य समापन, विरासत और संस्कृति का दिखा संगम

    मेन्यू में कटौती, कम गैस वाले व्यंजनों पर जोर

    शादियों में परोसे जाने वाले व्यंजनों की संख्या भी अब घटाई जा रही है। साउथ इंडियन, आलू टिकिया, गुलाब जामुन, जलेबी, इमरती और हलवा जैसे गैस खपत वाले स्टॉल कम किए जा रहे हैं। इनकी जगह अब दाल-बाफले जैसे कम ईंधन में बनने वाले व्यंजन प्राथमिकता में आ गए हैं, जिससे कम सिलेंडर में काम चल सके।

    ये भी पढ़ें: दमोह में सनसनीखेज वारदात: महिला के हाथ-मुंह बांधकर जिंदा जलाया, घर भी आग की भेंट

    कैटरर्स और मैरिज गार्डन संचालकों के सामने संकट

    कैटरर्स के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन गई है। पहले से बुकिंग होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे ऑर्डर लेने में भी असमंजस की स्थिति है। मैरिज गार्डन संचालकों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो उन्हें ग्राहकों के सामने मेन्यू छोटा करने या हाथ जोड़ने की नौबत आ सकती है।

    रोजाना होंगी हजारों शादियां

    फेडरेशन ऑफ एमपी टेंट एसोसिएशन के अनुसार प्रदेश में रोजाना 25 से 30 हजार शादियां होने की संभावना है। इन आयोजनों के लिए करीब ढाई लाख कमर्शियल गैस सिलेंडरों की जरूरत पड़ेगी, लेकिन वर्तमान में इसकी आपूर्ति बेहद सीमित है। स्थिति यह है कि कई लोग मजबूरी में ब्लैक में सिलेंडर खरीदने को तैयार हो रहे हैं, जिससे खर्च और बढ़ गया है।

    कैटरिंग संचालक हो रहे परेशान 

    कैटरिंग संचालकों का कहना है कि पहले शादियों में 15 से 20 स्टॉल लगते थे, लेकिन अब 7-8 तक सीमित हो गए हैं। गैस की कमी के कारण हमें मैन्यू बदलना पड़ रहा है और कम गैस वाले विकल्प चुनने पड़ रहे हैं। टेंट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रिंकू भटेजा ने कहा कि 15 अप्रैल से शादी सीजन शुरू हो रहा है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कैटरर्स के सामने बड़ा संकट है कि ऑर्डर लें या नहीं।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

    Latest Posts