गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है। खासतौर पर महाराष्ट्र में यह उत्सव बहुत भव्य रूप में देखने को मिलता है। लोग अपने घर और पंडालों में विघ्नहर्ता गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं और दस दिनों तक उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इन दिनों की गई पूजा से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में कभी भी टूटी या खंडित मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। पुरानी मूर्तियों को भी घर में रखना अशुभ माना जाता है। अगर ऐसी मूर्तियां आपके पास हैं, तो उन्हें आदरपूर्वक किसी नदी या बहते जल में प्रवाहित कर दें।
गणपति स्थापना से पहले घर को साफ करना बहुत जरूरी है। बेकार पड़ा सामान घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलाता है। इसलिए पुराने और अनुपयोगी सामान को घर से बाहर कर दें और पूजा स्थल को पूरी तरह स्वच्छ रखें।
वास्तु के अनुसार, घर में रुकी हुई या खराब घड़ी रखना अशुभ होता है। इससे दरिद्रता और दुर्भाग्य का प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए खराब घड़ी को या तो तुरंत ठीक करवा लें या फिर घर से हटा दें।
गणपति पूजा के स्थान को हमेशा साफ-सुथरा और पवित्र बनाए रखें। पूजा में चढ़ाए गए फूल, माला या पत्तों को कई दिनों तक वहीं न छोड़ें। रोजाना उनकी सफाई करें। स्वच्छ और पवित्र पूजा स्थल से बप्पा की कृपा बनी रहती है और पूजा में किसी भी तरह की बाधा नहीं आती।