नई दिल्ली। मनरेगा की जगह रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन विधेयक 2025 जी राम जी (VB G RAM G) बिल पेश किया गया तो विपक्ष के सांसदों ने खासा हंगामा किया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा जब मनरेगा बनाया गया तो सदन में मौजूद सभी दलों ने इसे सहमति दी थी। इसके कारण गरीब से गरीब लोगों को 100 दिन का रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी मेरे परिवार से नहीं हैं, लेकिन मेरे परिवार जैसे ही हैं और पूरे देश की यही भावना है।
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) ने गरीब लोगों को 100 दिन के रोजगार का अधिकार दिया था। यह बिल उस अधिकार को कमज़ोर करेगा। पहले ग्राम पंचायत तय करती थी कि मनरेगा का काम कहां और किस तरह का होगा, लेकिन यह बिल कहता है कि केंद्र सरकार तय करेगी कि फंड कहां और कब देना है। इसलिए ग्राम पंचायत का अधिकार छीना जा रहा है।
प्रियंका ने कहा कि मनरेगा में 90% अनुदान केंद्र से आता था, लेकिन इस विधेयक में ज्यादातर प्रदेशों में अब 60% अनुदान ही आएगा। इससे प्रदेशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत भार पड़ेगा। इस विधेयक द्वारा केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है और जिम्मेदारी घटाई जारी जा रही है। ये विधेयक काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने की बात करता है, लेकिन इसमें मज़दूरी बढ़ाने की कोई बात नहीं है।
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हंगामे के बीच बिल पेश किया, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं। उनका कहना था कि मोदी सरकार महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नए बिल का विरोध किया। थरूर ने शायराना अंदाज में कहा, देखो दीवानों ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम मत करो। उन्होंने महात्मा गांधी का नाम योजना से हटाने का विरोध करते हुए ये बात कही। उन्होंने कहा कि सिर्फ जी राम जी लिखकर ऐसा करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा महात्मा गांधी का रामराज्य सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक सामाजिक आर्थिक ब्लूप्रिंट था। यह सामाजिक सशक्तीकरण और उनकी ग्राम स्वराज की अवधारणा का हिस्सा था। यह समाज के सबसे पिछली पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्य धारा में लाने का प्रयास था।