IMF Growth Outlook : FY26 में 7.3% दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, FY27 में 6.4% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर अपना नजरिया और ज्यादा सकारात्मक कर लिया है। आईएमएफ ने अपनी ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को संशोधित किया है। नए अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है, जो अक्टूबर में जारी अनुमान से 0.7 प्रतिशत अंक अधिक है। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भी आईएमएफ ने विकास दर बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दी है। आईएमएफ का कहना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन के कारण मजबूत बनी हुई है। खासतौर पर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के नतीजे अनुमान से कहीं अच्छे रहे हैं।
अगले वर्षों में स्थिर हो सकती है विकास दर
इसके साथ ही, चौथी तिमाही में भी अर्थव्यवस्था में अच्छी गति बनी रहने के संकेत मिले हैं। इन्हीं कारणों से FY26 के लिए ग्रोथ अनुमान को बढ़ाया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले वर्षों में विकास दर थोड़ी स्थिर हो सकती है, क्योंकि अस्थायी और चक्रीय सहारे धीरे-धीरे कम हो जाएंगे। भारत की अर्थव्यवस्था ने इस साल की पहली छमाही में सभी को चौंकाया है, जब विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। सरकार ने भी 6 जनवरी को जारी अपने पहले अग्रिम अनुमान में FY26 के लिए 7.4% जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया था, जो आईएमएफ के ताजा आकलन के काफी करीब है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और घरेलू मांग तथा उपभोग में लचीलापन है।
आईएमएफ पहले ही बढ़ा चुका है अनुमान
आईएमएफ से पहले विश्व बैंक भी भारत को लेकर अपना अनुमान बढ़ा चुका है। विश्व बैंक ने FY26 के लिए भारत की विकास दर 7.2 प्रतिशत आंकी है और इसके बाद के वर्षों में करीब 6.5 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान जताया है। मजबूत घरेलू मांग और उपभोक्ता खर्च में स्थिरता को इसका मुख्य आधार बताया गया है। आईएमएफ ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी अपेक्षाकृत बेहतर तस्वीर पेश की है। वर्ष 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 3.3 प्रतिशत कर दिया गया है। व्यापार नीतियों में बदलाव जैसी चुनौतियों के बावजूद तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश, अनुकूल वित्तीय हालात और निजी क्षेत्र की अनुकूलन क्षमता वैश्विक विकास को सहारा दे रही है।












