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नहीं रहे पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय :71 साल की उम्र में निधन, ममता बनर्जी के साथ की थी TMC की स्थापना

पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और बंगाल की राजनीति के दिग्गज नेता मुकुल रॉय का 71 वर्ष की उम्र में कोलकाता में निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। वह तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों में अहम भूमिका निभा चुके थे। उनका निधन बंगाल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है।
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71 साल की उम्र में निधन, ममता बनर्जी के साथ की थी TMC की स्थापना
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कोलकाता। बंगाल की राजनीति में पर्दे के पीछे रहकर बड़े फैसले गढ़ने वाले, सत्ता के उतार-चढ़ाव को बेहद करीब से देखने वाले और कई राजनीतिक करवटों के साक्षी रहे मुकुल रॉय अब हमारे बीच नहीं रहे। एक समय जिनका नाम ममता बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस में सबसे ताकतवर रणनीतिकार के रूप में लिया जाता था, वही मुकुल रॉय सोमवार तड़के कोलकाता में दिल का दौरा पड़ने से दुनिया को अलविदा कह गए। उनके निधन के साथ ही बंगाल की राजनीति का एक अहम अध्याय समाप्त हो गया।

    कोलकाता में ली अंतिम सांस

    पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार (23 फरवरी) तड़के करीब 1:30 बजे कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में निधन हो गया। परिवार के अनुसार, उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।

    उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने निधन की पुष्टि करते हुए कहा कि, यह परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने बताया कि, मुकुल रॉय लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और पिछले काफी समय से उनका इलाज चल रहा था।

    लंबे समय से खराब चल रही थी सेहत

    पिछले कुछ सालों में मुकुल रॉय की सेहत लगातार गिरती चली गई थी। 2023 की शुरुआत में डॉक्टरों ने बताया था कि, वह डिमेंशिया और पार्किंसन जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित हैं, जिससे उनकी याददाश्त और शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो चुकी थीं।

    मार्च 2023 में उन्हें हाइड्रोसेफेलस की समस्या के चलते ब्रेन सर्जरी करानी पड़ी। इसके बाद जुलाई 2024 में घर पर गिरने से उनके सिर में गंभीर चोट लगी और खून का थक्का निकालने के लिए एक और सर्जरी करनी पड़ी।

    इसके अलावा वह डायबिटीज, सांस की तकलीफ और हाई ब्लड शुगर जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे थे, जिससे उनकी हालत और कमजोर हो गई थी। इसी कारण वह पिछले कुछ समय से सक्रिय राजनीति से लगभग दूर थे।

    यूथ कांग्रेस से शुरू हुआ सियासी सफर

    14 मई 1954 को उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा में जन्मे मुकुल रॉय ने राजनीति की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की थी। पढ़ाई में भी उनकी रुचि रही, उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से साइंस में स्नातक की डिग्री ली और बाद में मदुरै के कामराज विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए किया।

    1998 में जब All India Trinamool Congress की स्थापना हुई, तब मुकुल रॉय इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। धीरे-धीरे वह ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने लगे।

    TMC के प्रमुख रणनीतिकार और दिल्ली का चेहरा

    मुकुल रॉय को तृणमूल कांग्रेस का मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट कहा जाता था। 2006 में वह राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 से 2012 तक राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता रहे।

    2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत और 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार के अंत में उनकी रणनीतिक भूमिका अहम मानी जाती है। इसी जीत के बाद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनीं और मुकुल रॉय पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार हो गए।

    रेल मंत्री के रूप में कार्यकाल

    यूपीए-2 सरकार में पहले उन्होंने शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया। इसके बाद मार्च 2012 में विवादों के बीच उन्होंने दिनेश त्रिवेदी की जगह देश के 32वें रेल मंत्री का पद संभाला।

    20 मार्च से 21 सितंबर 2012 तक उनका रेल मंत्रालय का कार्यकाल रहा। हालांकि, बाद में नारदा स्टिंग ऑपरेशन विवाद ने उनकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया और पार्टी के भीतर उनका प्रभाव घटने लगा।

    TMC से निष्कासन और BJP में एंट्री

    2017 में तृणमूल कांग्रेस से निकाले जाने के बाद मुकुल रॉय ने नवंबर 2017 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। भाजपा में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।

    उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा के संगठन को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य में भाजपा की 18 सीटों की जीत में उनकी रणनीति को अहम माना गया। 2021 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा उम्मीदवार के तौर पर विधायक भी चुने गए।

    घर वापसी, लेकिन सक्रिय राजनीति से दूरी

    2021 के विधानसभा चुनाव के बाद अगस्त में वह ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में दोबारा तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। हालांकि, खराब स्वास्थ्य के कारण वह पहले जैसी सक्रिय भूमिका में नजर नहीं आए। 

    दलबदल मामला और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

    तृणमूल कांग्रेस में वापसी के बाद उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत मामला शुरू हुआ। कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया था।

    हालांकि, 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि, दलबदल से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की ठीक से जांच जरूरी है और इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष, सचिव और विपक्ष के नेता से जवाब मांगा।

    BJP नेता बोले- उनका योगदान हमेशा याद रहेगा

    मुकुल रॉय के निधन पर राजनीतिक जगत से शोक संदेशों का सिलसिला शुरू हो गया। भाजपा नेता दिलीप घोष ने उन्हें अनुभवी राजनीतिज्ञ बताते हुए कहा कि, वह लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में नहीं रहे, लेकिन उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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