भोपाल:जंगल के पहरेदार असुरक्षित, रेत माफियाओं के बढ़ते आतंक से डरे वनकर्मी

संतोष चौधरी, भोपाल। मुरैना में खनिज माफियाओं के हमले में वनकर्मी हरकेश गुर्जर की मौत के दो महीने बाद भी वन विभाग को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल सकी है। विभाग ने पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर विशेष सशस्त्र बल की सात अतिरिक्त बटालियन स्थाई रूप से मांगी हैं। प्रदेशभर में बीते एक वर्ष में वनकर्मियों पर 50 से अधिक हमले हो चुके हैं। वन कर्मचारियों का कहना है कि बिना पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों के कार्रवाई करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
मुरैना घटना के बाद बढ़ी सुरक्षा की मांग
मुरैना में खनिज माफियाओं के हमले में वनकर्मी हरकेश गुर्जर की मौत ने पूरे वन विभाग को झकझोर कर रख दिया था। घटना के दो महीने बाद भी विभाग के पास एसएएफ की केवल एक ही बटालियन वापस लौटी है। वन विभाग ने अब पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर सात अतिरिक्त एसएएफ बटालियन स्थाई रूप से उपलब्ध कराने की मांग की है। विभाग का मानना है कि बिना पर्याप्त सुरक्षा बल के अवैध उत्खनन और जंगल माफियाओं पर कार्रवाई करना बेहद कठिन हो गया है। लगातार बढ़ते हमलों ने वनकर्मियों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
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अतिरिक्त एसएएफ बटालियन की मांग
वन विभाग के पास वर्तमान में एसएएफ की 7वीं, 20वीं और 25वीं बटालियन की एक-एक टुकड़ी उपलब्ध है। हालांकि ये बटालियन स्थाई रूप से विभाग के नियंत्रण में नहीं रहतीं और जरूरत पड़ने पर दूसरी जगह भेज दी जाती हैं। मुरैना में हमले के समय भी एसएएफ की टुकड़ी पश्चिम बंगाल चुनाव ड्यूटी में तैनात थी। यही वजह रही कि वनकर्मियों को मौके पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल सकी। विभाग का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में स्थाई सुरक्षा बल की जरूरत अब बेहद जरूरी हो चुकी है।
प्रदेश के कई जिलों में सक्रिय हैं माफिया
प्रदेश के मुरैना, चंबल, ग्वालियर, बालाघाट, खंडवा और सागर जिलों में रेत, लकड़ी और खनिज माफिया लगातार सक्रिय हैं। अवैध उत्खनन और जंगलों की कटाई रोकने पहुंचने वाली टीमों पर कई बार हमले किए जा चुके हैं। बीते एक वर्ष के दौरान प्रदेशभर में वनकर्मियों पर 50 से अधिक हमले दर्ज हुए हैं। कई जगह माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि कार्रवाई करने वाली टीमों को धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़ता है। इससे वन विभाग के कर्मचारियों में लगातार असुरक्षा बढ़ रही है।
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वन कर्मचारियों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मध्यप्रदेश वन कर्मचारी मंच के अध्यक्ष अशोक पांडेय ने कहा कि सरकार के पास वन कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है। उन्होंने बताया कि वनकर्मियों को आत्मरक्षा के लिए पर्याप्त हथियार, वॉकी-टॉकी और वायरलेस सेट तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में विभाग अपने 9 साथियों को खो चुका है। वहीं एपीसीसीएफ (संरक्षण) अमित कुमार दुबे ने कहा कि वन विभाग अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और अतिरिक्त एसएएफ बटालियन की मांग को लेकर पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजा गया है।












