Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

CAA के तहत पहली बार बिहार में महिला को मिली भारतीय नागरिकता, 40 साल लंबी लड़ी लड़ाई

CAA के तहत पहली बार बिहार में महिला को मिली भारतीय नागरिकता, 40 साल लंबी लड़ी लड़ाई
भोजपुर। बिहार में पहली बार नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के तहत एक विदेशी महिला को भारतीय नागरिकता दी गई है। भोजपुर जिले की 60 वर्षीय सुमित्रा रानी साहा को भारतीय नागरिक घोषित किया गया। वो पिछले 39 वर्षों से आरा में रह रही थीं। यह मामला बिहार में नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत नागरिकता प्रदान करने का पहला मामला है।

बांग्लादेश से भोजपुर तक का सफर

सुमित्रा रानी साहा मूल रूप से कटिहार की रहने वाली थीं, लेकिन बचपन में अपनी बुआ के साथ पढ़ाई के लिए बांग्लादेश चली गईं। वहां उनके सभी दस्तावेज बांग्लादेशी बन गए। वर्ष 1985 में उनकी शादी भोजपुर के एक व्यक्ति से हुई। शादी के बाद वह भारत आ गईं, लेकिन बांग्लादेशी नागरिकता होने के कारण उन्हें भारत में रहने के लिए बार-बार वीजा रीन्यू कराना पड़ता था।

सीएए ने जगाई नई उम्मीद

सुमित्रा रानी साहा को भारतीय नागरिक बनने की प्रक्रिया में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके पति के निधन के बाद उनके जीवन में संघर्ष और बढ़ गया। इस बीच, नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 लागू होने के बाद, उनकी बेटियों ने इस कानून के तहत आवेदन किया। सुमित्रा और उनकी बेटियों ने संबंधित दस्तावेज तैयार कर आवेदन प्रक्रिया पूरी की।

प्रक्रिया में हुई कई स्तर की जांच

भारतीय विदेश मंत्रालय, सीबीआई, भारतीय डाक विभाग, पासपोर्ट विभाग, बिहार सरकार और सीआईडी ने उनकी नागरिकता के दावे की कई स्तर पर जांच की। इन सभी जांचों और प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद सुमित्रा रानी साहा को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई। उन्हें यह दर्जा सीएए के सेक्शन 5(1)(सी) के तहत दिया गया।

बेटियों ने निभाई अहम भूमिका

सुमित्रा की बेटियों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे लगातार सरकारी विभागों के पोर्टल पर सीएए के नियमों के बारे में पढ़ती रहीं और हर चरण में अपनी मां का सहयोग किया। उन्होंने सरकारी अधिकारियों से संपर्क किया और सभी दस्तावेजों को समय पर पेश किया।

लोगों ने किया परेशान

सुमित्रा ने बताया कि उन्हें समाज में बांग्लादेशी कहकर ताने दिए जाते थे। पड़ोसी विवाद होने पर अक्सर उन्हें बांग्लादेश लौट जाने की धमकी दी जाती थी। यहां तक कि पुलिस और सीआईडी के अधिकारी भी उन्हें वापस बांग्लादेश जाने के लिए कहते थे। इन सभी परेशानियों के बावजूद सुमित्रा और उनके परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। सुमित्रा ने नागरिकता मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "हमने 40 साल तक भारतीय बनने के लिए संघर्ष किया। अब हमें खुशी है कि हम भारतीय नागरिक बन गए हैं।" उनका बांग्लादेशी पासपोर्ट और वीजा पहले से अपडेट था, लेकिन अब उन्हें स्थायी भारतीय नागरिकता मिल चुकी है। ये भी पढ़ें- अपने बयान पर रमेश बिधूड़ी ने दी सफाई, कहा- मेरी बात से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं अपने शब्द वापस लेता हूं
Wasif Khan
By Wasif Khan

फिलहाल जुलाई 2024 से पीपुल्स अपडेट में सब-एडिटर हूं। बीते 3 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हूं। 12वीं म...Read More

Latest Posts