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पहली बार डॉ. हेडगेवार के जीवन पर केंद्रित प्रस्तुति का मंचन, भोपाल से हुई शुरुआत

साहित्यकार लक्ष्मीनारायण भाला ने 101 काव्य कड़ियों में संजोया डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन प्रसंग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के शताब्दी वर्ष आगमन और संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को रवींद्र भवन में पहली बार उनके जीवन पर केंद्रित प्रस्तुति का मंचन किया गया। कोरोना काल से इस प्रस्तुति के लिए विचार-मंथन चल रहा था और पिछले दो महीनों में इस प्रस्तुति ने आकार लिया। प्रस्तुति के रचियता वरिष्ठ प्रचारक व 75 वर्षीय साहित्यकार लक्ष्मीनारायण भाला है। श्री भाला ने बताया कि उन्होंने डॉ. हेडगेवार के जीवन प्रसंगों को संजोते हुए 101 काव्य कड़ियों की रचना की, जिसमें से 11 पीस प्रस्तुत किए गए क्योंकि इतने विराट व्यक्तित्व को 1 घंटा 10 मिनट में दिखाना मुश्किल है। प्रस्तुतियों में देश की एकता व सद्भाव को लेकर उनकी सोच, जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त उनके कार्यों को शास्त्रीय नृत्यों के माध्यम से दिखाया गया।

मानव निर्माण की दिशा में किया प्रेरित

नृत्य प्रस्तुति में नृत्यांगनाओं ने डॉ. हेडगेवार के बचपन से लेकर राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित होने तक की यात्रा एक के बाद एक काव्य गीतों के माध्यम से नृत्य की भाव-भंगिमाओं में समाहित करते हुए प्रस्तुत कीं। इसमें दिखाया गया कि राष्ट्र निर्माण की प्रथम कड़ी है, मनुष्य निर्माण। हम नर से नरोत्तम कैसे बनें इसी बात का चिंतन करते हुए डॉ. हेडगेवार ने मानव निर्माण की दिशा में प्रेरित किया।

चार नृत्य शैली और मार्शल आर्ट को किया शामिल

शास्त्रीय नृत्य पर आधारित इस प्रस्तुति में 13 कलाकारों ने मणिपुरी नृत्य, भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी शैली में प्रस्तुति दी। साथ ही मणिपुर से अखोम गोविंद और लैशराम कपिल थांग-टा मार्शल आर्ट की प्रस्तुति इस परफॉर्मेंस में देते नजर आए। गुरु शुभदा वराडकर ने ओडिसी, डॉ. वृषाली दाबके ने कथक, डॉ. संध्या पुरेचा ने भरतनाट्यम व गुरु लतासना देवी ने मणिपुरी नृत्य प्रस्तुत किया। केशव कल्प में श्रोताओं को ‘प्रश्न है बस प्रश्न मन में उठ रहे थे बाल पन में…, जन्म से तो नर बने हम, यत्न से बनते नरोत्तम…,’ गीत सुनाई दिए, जिसमें डॉ. हेडगेवार के जीवन प्रसंगों को उजागर किया गया। इस मौके पर केशव-कल्प आयोजन समिति के मुख्य संयोजक हरिओम जटिया सहित कला प्रेमी उपस्थित रहे। भोपाल के बाद अब यह प्रस्तुति देशभर में मंचित की जाएगी।

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