देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में शुक्रवार का दिन खास रहा, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सियासी समीकरणों को नया रंग दे दिया। लंबे समय से चर्चा में चल रहा यह विस्तार आखिरकार हकीकत बन गया और पांच विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (रिटायर्ड) ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
कैबिनेट विस्तार के तहत खजान दास, भरत सिंह चौधरी, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा को मंत्री बनाया गया है। ये सभी राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं—देहरादून, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, रुड़की और भीमताल से जुड़े ये चेहरे क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत करेंगे। इनमें चौधरी, बत्रा और कैड़ा पहली बार मंत्री बने हैं, जबकि खजान दास और मदन कौशिक पहले भी कैबिनेट का हिस्सा रह चुके हैं। नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद अब उत्तराखंड कैबिनेट की कुल संख्या 12 हो गई है, जो संवैधानिक सीमा के अनुसार अधिकतम है।
इस विस्तार के पीछे सबसे बड़ा मकसद गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों के साथ-साथ मैदानी और पहाड़ी इलाकों के बीच संतुलन बनाना माना जा रहा है। भाजपा नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि राज्य के हर क्षेत्र को सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। मुख्यमंत्री धामी ने नए मंत्रियों को बधाई देते हुए कहा कि पूरी टीम मिलकर राज्य के विकास और जनता की सेवा के लिए काम करेगी। उन्होंने टीम वर्क पर जोर देते हुए साफ किया कि सरकार का फोकस विकास कार्यों को गति देने पर रहेगा।
कैबिनेट विस्तार की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही थी क्योंकि पिछले कुछ समय में मंत्रिपरिषद में कई पद खाली हो गए थे। 2022 में भाजपा के दोबारा सत्ता में आने पर नौ मंत्रियों ने शपथ ली थी, लेकिन समय के साथ एक मंत्री के निधन और एक के इस्तीफे के चलते संख्या घटकर सात तक पहुंच गई थी। अप्रैल 2023 में चंदन राम दास के निधन और बाद में प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे ने स्थिति और बदल दी। ऐसे में लंबे समय से लंबित विस्तार अब जाकर पूरा हुआ है, जिससे सरकार को नई ऊर्जा और संतुलन मिलने की उम्मीद है।