ChatGPT से IPL की नकली टिकट बेच रहे थे...एंट्री गेट पर स्कैन कराया तो खुली पोल, 4 आरोपी लखनऊ से गिरफ्तार

लखनऊ में आईपीएल 2026 के दौरान फर्जी टिकट बेचने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। लखनऊ पुलिस ने इकाना स्टेडियम के बाहर कार्रवाई करते हुए चैट जीपीटी गैंग का भंडाफोड़ कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी चैट जीपीटी और डिजाइन सॉफ्टवेयर की मदद से असली जैसे दिखने वाले नकली टिकट तैयार कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से लैपटॉप, फर्जी टिकट, पास, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासबुक और एक कार बरामद की है।
सोशल मीडिया से ली टिकट की तस्वीरें
डीसीपी दक्षिण अमित कुमार आनंद के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया पर वायरल असली टिकटों की तस्वीरें डाउनलोड करते थे। इसके बाद चैट जीपीटी की मदद से टिकट का आकार और डिजाइन तैयार किया जाता था। फिर डिजाइन सॉफ्टवेयर की सहायता से नकली टिकट तैयार किए जाते थे। आरोपियों ने पेपर की गुणवत्ता और बारकोड जैसी चीजों पर भी खास ध्यान दिया, ताकि टिकट बिल्कुल असली लगें।
दिल्ली में भी कर चुके थे कोशिश
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे शहरों में भी सक्रिय था। आरोपी इससे पहले अरुण जेटली स्टेडियम के बाहर भी फर्जी आईपीएल टिकट बेचने की कोशिश कर चुके थे। हालांकि वहां टिकटों के बारकोड और गुणवत्ता में गड़बड़ी पकड़ ली गई थी, जिसके कारण उनका खेल ज्यादा नहीं चल पाया।
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यूपीआई भुगतान बना गिरफ्तारी की वजह
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने उरई निवासी प्रदीप सिंह को एक हजार रुपये में नकली आईपीएल टिकट बेचा था। टिकट खरीदने के दौरान भुगतान यूपीआई के जरिए किया गया।
जब प्रदीप मैच देखने के लिए इकाना स्टेडियम पहुंचे, तब जांच के दौरान टिकट फर्जी निकला। इसके बाद उन्होंने टिकट बेचने वालों की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने यूपीआई लेनदेन के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
विराट कोहली की दीवानगी का उठाया फायदा
जिस मुकाबले के दौरान यह ठगी हुई, उसमें लखनऊ सुपर जायंट्स और RCB आमने-सामने थीं। मैच में विराट कोहली को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग स्टेडियम पहुंचे थे। इसी भीड़ और उत्साह का फायदा उठाकर आरोपी स्टेडियम के बाहर फर्जी टिकट बेच रहे थे।
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कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
गिरफ्तार आरोपी छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इनमें राजेंद्र चौधरी, विश्वजीत साहू, श्रीकांत बोरकर और नूतन कुमार साहू शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, नूतन डिप्लोमा धारक है, जबकि विश्वजीत ने इंटरनेट और कोरल ड्रॉ देखकर डिजाइनिंग सीखी थी। गिरोह का मास्टरमाइंड श्रीकांत बोरकर स्नातक है और कार धुलाई के साथ डिजाइनिंग का काम करता था। वहीं राजेंद्र चौधरी भी कार धुलाई का काम करता था।
पुलिस कर रही नेटवर्क की जांच
लखनऊ पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने देश के किन-किन शहरों में फर्जी टिकट बेचे हैं और इनके साथ और कौन लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है।











