Urban Heat Islands :कांक्रीट की सड़कों का विस्तार और ग्लास पैनल के कारण बढ़ रही गर्मी, अर्बन हीट आइलैंड्स बनते जा रहे हैं टियर-2 सिटीज

संतोष चौधरी, भोपाल। देश में गर्मी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भोपाल, इंदौर जैसे टियर-2 सिटीज अर्बन हीट आइलैंड्स बनते जा रहे हैं। मप्र में तो अभी भी ब्लू-ग्रीन स्पेसेस और वॉटर स्त्रोत बेहतर है, इससे बढ़ती गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इससे हीट इनइक्वलिटी भी कम होगी। यह कहना है कि वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट, देहरादून के साइंटिस्ट डॉ. गौतम तालुकदार का। वे पहले राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने भोपाल पहुंचे थे। पीपुल्स समाचार ने उनसे पर्यावरण, जैव विविधता और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर चर्चा की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश-:
सोलर पैनल लगेंगे तो बढ़ सकता है हीट इफेक्ट
सवाल : दिन में गर्मी ठीक है, लेकिन रात में क्यों बढ़ रही है?
जवाब : शहरी गर्मी और रातों का तापमान बढ़ना केवल मौसम की बात नहीं है, यह हमारे शहरी फैसलों का नतीजा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार हर नागरिक को 300 मीटर के दायरे में हरित स्थान मिलना चाहिए, लेकिन भारत के अधिकांश शहर इसमें विफल हैं। इसका मुख्य कारण कांक्रीट का बढ़ता उपयोग, सड़कों का विस्तार, ग्लास पैनल और तेजी से हो रहा निर्माण कार्य है। परमीएबल सतहें कम हो रही हैं और पानी को जमीन में जाने देने वाली जगहें घटती जा रही हैं। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी को नियंत्रित करने का सबसे सरल उपाय है पेड़ लगाइए।
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सवाल : भोपाल के सिटी बायोडायवर्सिटी इंडेक्स को आप कैसे देखते हैं?
जवाब : भोपाल का सिटी बायोडायवर्सिटी इंडेक्स काफी अच्छा है। इसे 72 में से लगभग 44 अंक मिले हैं। इसमें और सुधार की काफी संभावनाएं हैं। भविष्य में बेहतर स्कोर के लिए नगर निगम और शहरी स्थानीय निकायों को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
सवाल : मप्र के अन्य शहरों में भी बायोडायवर्सिटी इंडेक्स की क्या प्रक्रिया होगी?
जवाब : अभी तक भोपाल और इंदौर के लिए यह कार्य किया गया है। मप्र राज्य जैव विविधता बोर्ड ग्वालियर और जबलपुर को भी इसमें शामिल करने की योजना बना रहा है। यह इंडेक्स शहरों की जैव विविधता और ब्लू-ग्रीन स्पेस की स्थिति का मूल्यांकन करता है।
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सवाल : क्या सोलर पैनल भी गर्मी बढ़ाने में योगदान देते हैं?
जवाब : कुछ हद तक हां। सोलर पैनल ऊर्जा अवशोषित करते हैं और बाद में ऊष्मा छोड़ते हैं। तो, रात में वो गर्म हो जाएगा। अगर छोटी-छोटी जगह पर आप कहीं-कहीं सोलर पैनल लगाएंगे, कुछ नहीं होगा। लेकिन, पूरे शहर में कर देंगे, तो वो हीट का भट्ठा बन जाएगा।
सवाल : मानव-वन्य प्राणी संघर्ष कैसे कम होगा?
जवाब : केंद्र सरकार इस दिशा में काम कर रही है। कोयंबटूर में इसके प्रबंधन के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जा रहा है।












