मिर्गी का दौरा पड़ने पर जूता-मोजा सुंघाने से हो जाता है इलाज?जानिए इस पुराने घरेलू नुस्खे का पूरा सच

भारत में आज भी जब किसी व्यक्ति को मिर्गी का दौरा पड़ता है तो आसपास मौजूद लोग अक्सर उसे जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने लगते हैं। कई लोग इसे घरेलू इलाज मानते हैं, जबकि कुछ लोग मरीज के मुंह में चम्मच डालने या पानी पिलाने की भी कोशिश करते हैं। वर्षों से चली आ रही ये मान्यताएं इतनी गहरी हो चुकी हैं कि कई बार लोग इन्हें वैज्ञानिक इलाज समझ बैठते हैं।
न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, मिर्गी के दौरे में जूता या मोजा सुंघाने का कोई चिकित्सकीय फायदा नहीं होता। उल्टा गलत जानकारी और देरी मरीज के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। आइए जानते हैं कि इस मिथक के पीछे की सच्चाई क्या है और मिर्गी का दौरा पड़ने पर वास्तव में क्या करना चाहिए।
मिर्गी क्या है और क्यों पड़ता है दौरा?
मिर्गी (Epilepsy) दिमाग से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। इसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं अचानक असामान्य तरीके से इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजने लगती हैं। इसके कारण दिमाग का सामान्य कामकाज कुछ समय के लिए प्रभावित हो जाता है और व्यक्ति को दौरा पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार, मिर्गी किसी भी उम्र में हो सकती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सिर पर गंभीर चोट, स्ट्रोक, दिमाग में संक्रमण, ब्रेन ट्यूमर, ऑक्सीजन की कमी, ब्लड शुगर का असंतुलन और कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण शामिल हैं।
आखिर मोजा या जूता सुंघाने की परंपरा कहां से आई?
लंबे समय से लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि जूते या मोजे की तेज गंध मरीज को होश में ला सकती है। यही वजह है कि दौरा पड़ते ही कई लोग सबसे पहले यही उपाय अपनाते हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि, मिर्गी का अधिकांश दौरा कुछ सेकंड से लेकर एक-दो मिनट के भीतर अपने आप समाप्त हो जाता है। अगर इसी दौरान किसी ने मरीज को जूता या मोजा सुंघा दिया और कुछ देर बाद मरीज सामान्य हो गया, तो लोग मान लेते हैं कि वह इसी वजह से ठीक हुआ है। असल में मरीज का सामान्य होना दौरे के प्राकृतिक रूप से समाप्त होने की प्रक्रिया होती है। इसका जूते या मोजे की गंध से कोई संबंध नहीं होता।
क्या जूता या मोजा सुंघाने से सच में मरीज ठीक हो जाता है?
इस सवाल का जवाब साफ है नहीं। न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि, मिर्गी के दौरे के दौरान जूता, चप्पल या मोजा सुंघाने से दिमाग की असामान्य इलेक्ट्रिकल गतिविधि पर कोई असर नहीं पड़ता। इसलिए यह उपाय न तो दौरा रोकता है और न ही बीमारी का इलाज है। कई बार मरीज के मुंह के पास जूता या अन्य वस्तु ले जाने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे घरेलू उपायों पर भरोसा करने के बजाय सही प्राथमिक उपचार देना ज्यादा जरूरी है।
क्या हर ब्रेन या न्यूरोलॉजिकल समस्या मिर्गी होती है?
जानकारी के अनुसार, हर बेहोशी या झटके आने की स्थिति मिर्गी नहीं होती। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ रहे हैं, अचानक बेहोशी हो रही है या शरीर पर नियंत्रण खोने जैसी समस्या हो रही है, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और इलाज से अधिकांश मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
दौरे के दौरान कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?
मिर्गी के लक्षण हर मरीज में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों में हल्के लक्षण दिखाई देते हैं, जबकि कुछ मामलों में दौरा गंभीर भी हो सकता है। आम लक्षणों में शामिल हैं-
- अचानक बेहोश हो जाना
- हाथ-पैरों में तेज झटके आना
- शरीर में अकड़न महसूस होना
- मुंह से झाग निकलना
- जबड़ा जकड़ जाना
- कुछ सेकंड तक एकटक देखते रहना
- चक्कर खाकर गिर जाना
- बोलने या प्रतिक्रिया देने में परेशानी
- दौरे के बाद भ्रम, कमजोरी या अत्यधिक थकान महसूस होना
मिर्गी का दौरा पड़ने पर तुरंत क्या करना चाहिए?
जानकारी के अनुसार, सही फर्स्ट एड मरीज की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
मरीज को करवट के बल लिटाएं
मरीज को सुरक्षित जगह पर एक करवट से लिटा दें। इससे मुंह में जमा लार या झाग आसानी से बाहर निकल सकेगा और सांस लेने में परेशानी नहीं होगी।
आसपास की खतरनाक चीजें हटा दें
मरीज के आसपास रखी कुर्सी, मेज, कांच या नुकीली वस्तुओं को तुरंत दूर कर दें ताकि झटकों के दौरान उसे चोट न लगे।
तंग कपड़ों को ढीला करें
गर्दन और छाती के आसपास के टाइट कपड़ों को ढीला कर दें, जिससे मरीज को सांस लेने में आसानी हो।
दौरे का समय नोट करें
ध्यान रखें कि दौरा कितनी देर तक चला। अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा समय तक जारी रहे तो तुरंत मेडिकल सहायता लें।
दौरे के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
मिर्गी के दौरे में कई लोग घबराकर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो मरीज के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। इन बातों से बचें-
- जूता, चप्पल या मोजा न सुंघाएं।
- मरीज के मुंह में चम्मच न डालें।
- जबरदस्ती पानी न पिलाएं।
- कोई दवा मुंह में न डालें।
- मरीज को पकड़कर झटके रोकने की कोशिश न करें।
मिर्गी का इलाज संभव है?
डॉक्टरों के अनुसार, सही इलाज और नियमित दवाओं की मदद से अधिकांश मरीजों में मिर्गी को नियंत्रित किया जा सकता है। कई मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन भी जीते हैं। इसलिए बीमारी को लेकर डरने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और सही उपचार शुरू करना सबसे जरूरी है।











