Peoples Update Special :बेटियों को गोद में ही मिल रही आधार की पहचान, बेटों को स्कूल तक करना होता है इंतजार

सरकारी योजनाओं ने परिवारों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। विभिन्न योजनाओं के लाभ के लिए लोग बेटियों के आधार कार्ड जैसे दस्तावेज कम उम्र में ही बनवा रहे हैं, जबकि बेटों के लिए स्कूल की शुरुआत का इंतजार किया जाता है। छह माह से कम उम्र के बच्चों के बने आधार में करीब 78% बेटियां हैं।
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बेटियों को गोद में ही मिल रही आधार की पहचान, बेटों को स्कूल तक करना होता है इंतजार
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लेखक-प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। कभी परिवारों में बेटे के जन्म से सबसे पहले ही उसके भविष्य की योजनाएं बनने लगती थीं, जबकि बेटियों के आने पर खुशियां भी गायब हो जाती थीं। अब तस्वीर बदल रही है। कम से कम सरकारी योजनाओं के मामले में बेटियां परिवारों की पहली प्राथमिकता बन गई हैं। हाल यह है कि राजधानी में जन्म के दो-तीन महीने बाद ही माता-पिता नवजात बेटियों को गोद में लेकर आधार सेवा केंद्र पहुंच रहे हैं, ताकि लाड़ली लक्ष्मी, सुकन्या समृद्धि और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। दूसरी ओर, अधिकांश परिवारों में बेटों का आधार कार्ड आज भी तब बनता है, जब स्कूल में दाखिले की जरूरत पड़ती है। दरअसल लाड़ली लक्ष्मी, सुकन्या समृद्धि और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड जरूरी होता है।

कई परिवार तो ऐसे भी हैं जहां बेटियों के आधारकार्ड से लेकर बैंक अकाउंट सब बन गए, लेकिन उनके बड़े भाई के नहीं। शहर के आधार सेवा केंद्रों से जुटाई जानकारी भी इसी बदलती सोच की पुष्टि करती है। पिछले छह महीनों में छह माह से कम उम्र के बच्चों के बने आधार कार्डों में लगभग 78 प्रतिशत बेटियां रहीं

उदाहरण : 1-तीन महीने की अन्वी का पहला दस्तावेज बना आधार 

अरेरा कॉलोनी निवासी रोहित शर्मा ने बेटी अन्वी के जन्म के तीन महीने बाद ही उसका आधार बनवा दिया। उनका कहना है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना और भविष्य की अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ बिना किसी देरी के मिले, इसलिए शुरूआत से ही सभी दस्तावेज तैयार कर लिए।

उदाहरण : 2- चार महीने की आराध्या का भी बनवाया आधार

चौकसे नगर निवासी अमित वर्मा ने चार महीने की बेटी आराध्या का आधार बनवाया। उनका कहना है कि अब बेटी के जरूरी दस्तावेज समय रहते तैयार करना ही बेहतर है। हलांकि उनका बेटा दो साल का हो गया, लेकिन अब तक आधार कार्ड नहीं बना।

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हर पांच में चार आधार बेटियों के 

एमपी नगर, न्यू मार्केट, अशोका गार्डन, गोविंदपुरा, कोलार और जीपीओ (मुख्य डाकघर) स्थित आधार सेवा केंद्रों से जुटाई गई जानकारी के अनुसार पिछले छह महीनों में छह माह से कम उम्र के करीब 227 बच्चों के आधार बने। इनमें लगभग 176 बेटियां (करीब 78%) और 51 बेटे (22%) रहे। केंद्रों के कर्मचारियों का कहना है कि बेटियों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की जल्दी इस अंतर की सबसे बड़ी वजह है।

पहले स्कूल में बनता था आधार, अब जन्म के साथ 

आधार सेवा केंद्रों के कर्मचारियों के अनुसार कुछ वर्ष पहले अधिकांश परिवार छोटे बच्चों का आधार स्कूल में प्रवेश के समय बनवाते थे। अब सरकारी योजनाओं के कारण जन्म के एक-दो महीने बाद ही माता-पिता नवजात बेटियों को लेकर केंद्र पहुंचने लगे हैं। इससे आधार बनवाने का ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है।

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 सरकारी योजनाएंओं ने क्यों बदल दी तस्वीर?

  • लाड़ली लक्ष्मी योजना : जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक चरणबद्ध आर्थिक सहायता।
  • सुकन्या समृद्धि योजना : बालिका के भविष्य के लिए सुरक्षित बचत योजना।
  • डीबीटी आधारित योजनाएं : अधिकांश सरकारी सहायता सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
  • विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं : आधार और बैंक खाते के माध्यम से लाभ दिया जाता है।
Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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