US-Iran Deal :ट्रंप की ईरान को धमकी, अभी समझौता पक्का नहीं', डील पसंद नहीं आई तो बरसाएंगे बम

इंटरनेशनल डेस्क। ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान से जुड़ा मौजूदा मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यदि अंतिम समझौता उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा तो अमेरिका सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।
मजबूत समझौते का दावा, लेकिन अंतिम तस्वीर बाकी
बैठक के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ बातचीत के बाद एक बेहद मजबूत और प्रभावशाली समझौते का खाका तैयार किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी तक इस डील की अंतिम शर्तें पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। ट्रंप के मुताबिक बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है, लेकिन अंतिम निर्णय सभी पहलुओं के मूल्यांकन के बाद ही लिया जाएगा।
दुनिया की नजरें अमेरिका-ईरान वार्ता पर
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकांश लोग इस संभावित समझौते को लेकर संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं। उनका मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है तो इससे वैश्विक आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिल सकती है। ट्रंप ने संकेत दिया कि बातचीत विफल होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर पड़ सकता है, जिससे आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने का खतरा रहेगा।
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मंदी की बात करने वालों पर ट्रंप का हमला
वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर ट्रंप ने अपने आलोचकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग दुनिया में आर्थिक मंदी देखना चाहते हैं, लेकिन ऐसे लोग वैश्विक स्थिरता और विकास के महत्व को नहीं समझते। ट्रंप ने कहा कि जो लोग मंदी की कामना करते हैं, वे वैश्विक अर्थव्यवस्था के हितों के खिलाफ सोच रहे हैं।
समुद्री मार्ग पर रहस्यमयी टिप्पणी
अपने बयान के दौरान ट्रंप ने कहा, नंबर एक, स्ट्रेट कभी नहीं खुलेगा। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस समुद्री मार्ग या जलडमरूमध्य की ओर था। इस टिप्पणी के बाद अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया के कई समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
300 अरब डॉलर निवेश की खबरों का खंडन
ट्रंप ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ईरान में 300 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उनके अनुसार अमेरिका किसी भी संभावित समझौते के हिस्से के रूप में इतना बड़ा निवेश करने की योजना नहीं बना रहा है और इस तरह की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं।
डील नहीं पसंद आई तो सैन्य विकल्प रहेगा तैयार
ईरान के साथ चल रही बातचीत की स्थिति स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि मौजूदा MOU अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है। उन्होंने दोहराया कि यदि अंतिम समझौता अमेरिका के हितों के अनुरूप नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प फिर से मेज पर आ सकता है। इस बयान को ईरान के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
जी-7 सम्मेलन में बढ़ी कूटनीतिक हलचल
जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान आए ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका एक तरफ समझौते की संभावना को जीवित रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति भी जारी रखे हुए है। इससे साफ संकेत मिलता है कि वाशिंगटन अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।












