एस्केलेटर बंद, टेलीप्रॉम्प्टर फेल और साउंड सिस्टम खराब… डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ UN में हुई 3 साजिशें? राष्ट्रपति ने की जांच की मांग

वॉशिंगटन डीसी। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई तकनीकी और सुरक्षा गड़बड़ियों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने इन्हें एक “साजिश” बताते हुए यूनाइटेड नेशंस (UN) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि, मंगलवार को उनके साथ लगातार तीन घटनाएं हुईं, जिन्हें महज संयोग नहीं माना जा सकता। ट्रंप ने इसकी जांच की मांग की है और महासचिव को पत्र भी लिखा है।
तीन घटनाएं, जिनसे नाराज हुए ट्रंप
1. एस्केलेटर अचानक रुकना
ट्रंप अपनी पत्नी मेलानिया के साथ सभा हॉल की ओर जा रहे थे। तभी मुख्य एस्केलेटर अचानक रुक गया। ट्रंप का कहना है कि यदि वे रेलिंग पकड़कर न चलते तो दोनों गिर सकते थे। उन्होंने इसे जानबूझकर की गई कार्रवाई बताते हुए जिम्मेदारों की गिरफ्तारी की मांग की।
2. टेलीप्रॉम्प्टर का खराब होना
UNGA के मंच पर भाषण शुरू करते ही ट्रंप का टेलीप्रॉम्प्टर काम करना बंद कर गया। ट्रंप ने कहा कि, यह दूसरी बड़ी गड़बड़ी थी। इसके बावजूद उन्होंने बिना टेलीप्रॉम्प्टर के 57 मिनट का भाषण दिया और कहा कि भाषण को शानदार प्रतिक्रिया मिली।
3. साउंड सिस्टम की खराबी
भाषण खत्म होने के बाद सभागार में साउंड सिस्टम बंद हो गया। ट्रंप ने बताया कि, कई विश्व नेताओं को उनकी स्पीच सुनने के लिए अनुवादक ईयरपीस का सहारा लेना पड़ा। यहां तक कि उनकी पत्नी मेलानिया ने भी कहा कि, उन्हें भाषण का एक भी शब्द सुनाई नहीं दिया।
ट्रंप बोले- ये कोई संयोग नहीं, साजिश है
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा- “संयुक्त राष्ट्र को अपने आप पर शर्म आनी चाहिए। ये तीनों घटनाएं महज तकनीकी खराबी नहीं थीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थीं। अब समय है कि इसकी जांच हो और जिम्मेदारों को सजा मिले।”
उन्होंने मांग की है कि, एस्केलेटर के सभी सुरक्षा कैमरों और आपातकालीन स्टॉप बटन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए, ताकि सीक्रेट सर्विस जांच कर सके।
ट्रंप के भाषण की 8 खास बातें
गड़बड़ियों के बावजूद ट्रंप का भाषण चर्चा का विषय रहा। उन्होंने कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी-
- दावा किया कि उन्होंने अब तक 7 युद्ध रोके हैं।
- भारत और चीन पर आरोप लगाया कि वे रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहे हैं।
- कहा कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था।
- यूरोप में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या को बड़ा संकट बताया।
- संयुक्त राष्ट्र पर युद्ध रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया।
- फिलिस्तीन को एकतरफा मान्यता देने को “हमास के लिए पुरस्कार” करार दिया।
- यूरोप की रूस पर ऊर्जा निर्भरता की आलोचना की।
- परमाणु और जैविक हथियारों पर रिसर्च रोकने की अपील की।
2018 में भी UN में बनी थी चर्चा
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप का भाषण संयुक्त राष्ट्र में सुर्खियों में आया हो। 25 सितंबर 2018 को उन्होंने दावा किया था कि दो साल से कम समय में उन्होंने किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति से ज्यादा काम किया है। उनकी बात पर विश्व नेता हंसने लगे थे। ट्रंप ने उस समय कहा था- “मुझे ऐसे रिएक्शन की उम्मीद नहीं थी, लेकिन कोई बात नहीं।”











