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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर डिंडौरी को राष्ट्रीय सम्मान, 12,258 किसानों ने अपनाई प्राकृतिक खेती

मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय सम्मान मिला। जिले में 12,258 किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई है और 33 जैव संसाधन केंद्र स्थापित किए गए हैं।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर डिंडौरी को राष्ट्रीय सम्मान

डिंडौरी। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले को प्राकृतिक और टिकाऊ खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। सोमवार को नई दिल्ली स्थित पूसा भवन में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के राष्ट्रीय कार्यक्रम में जिले को यह सम्मान दिया गया। यह पुरस्कार प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदान किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया और अमरपुर विकासखंड के अलोनी गांव की महिला किसान एवं कृषि सखी कमला यादव को संयुक्त रूप से सम्मान और प्रमाण-पत्र प्रदान किया। जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों को इससे जोड़ने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के प्रयासों को इस उपलब्धि का आधार बताया गया है।

एक साल में 12,258 किसानों ने अपनाई प्राकृतिक खेती

डिंडौरी जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पिछले एक वर्ष के दौरान बड़े स्तर पर काम किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस अवधि में 12,258 किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई है। इसके साथ ही जिले में 33 जैव संसाधन केंद्र स्थापित किए गए हैं और 4,650 किसानों को जैविक प्रमाण-पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को खेती के ऐसे तरीकों से जोड़ना है, जिनमें रासायनिक खादों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम हो और मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति को बनाए रखने पर जोर दिया जाए। जैव संसाधन केंद्रों के माध्यम से प्राकृतिक खेती से जुड़े संसाधनों को उपलब्ध कराने और किसानों को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।

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महिला किसानों के योगदान को मिला सम्मान

डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने राष्ट्रीय सम्मान को जिले के किसानों, विशेषकर महिला कृषकों के परिश्रम और समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती और एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए संबंधित विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। कलेक्टर के अनुसार जिले में किसानों की रासायनिक खादों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति को बनाए रखना और जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना प्रमुख लक्ष्य हैं। इन प्रयासों में महिला किसानों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है।

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खेती की लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता पर जोर

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के पीछे खेती की लागत कम करना, मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखना और पर्यावरण संरक्षण जैसे उद्देश्य हैं। रासायनिक खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल घटने से किसानों को खेती की लागत नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ फसल, उत्पादन, बाजार भाव और खेती की पद्धति पर निर्भर करेगा। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने कहा कि आने वाले समय में जिले के प्रत्येक किसान को इस पहल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों का दायरा बढ़ाना है ताकि अधिक किसान इन तरीकों को अपना सकें।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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