PlayBreaking News

आटा चक्की से बम!दिल्ली ब्लास्ट केस में डॉक्टरों का खतरनाक खेल उजागर, NIA के हाथ लगे बड़े सुराग

दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टरों पर आतंकी मॉड्यूल चलाने का आरोप सामने आया है। NIA की छापेमारी में 2900 किलो विस्फोटक सामग्री, आटा चक्की से बना बम मैकेनिज्म और महिला आतंकी टीम की प्लानिंग का पता लगा है।
Follow on Google News
दिल्ली ब्लास्ट केस में डॉक्टरों का खतरनाक खेल उजागर, NIA के हाथ लगे बड़े सुराग
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट की जांच जितनी आगे बढ़ रही है, उतनी ही चौंकाने वाली परतें सामने आ रही हैं। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टर, जिन्हें समाज का रक्षक माना जाता है, वो एक घातक आतंकी मॉड्यूल चला रहे थे। NIA और दिल्ली पुलिस की संयुक्त जांच ने इस पूरे नेटवर्क की रचना, काम करने के तरीके और इसके दायरे का बड़ा खुलासा किया है।

    डॉक्टरों की टीम या आतंकी मॉड्यूल?

    लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट ने देश को झकझोर दिया था, लेकिन असली हैरानी तब हुई जब जांच एजेंसियों ने पाया कि इस हमले के पीछे मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े लोग सक्रिय थे। डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन और डॉ. आदिल जैसे डॉक्टर न केवल आतंकियों को शरण और सपोर्ट दे रहे थे, बल्कि खुद विस्फोटक तैयार कर बड़े हमले की तैयारी में भी शामिल थे।

    बम बनाने का गुप्त हथियार बनी आटा चक्की

    सबसे चौकाने वाली बात सामने आई कि, डॉ. मुजम्मिल एक आटा चक्की को विस्फोटक तैयार करने के उपकरण की तरह इस्तेमाल करता था। वह इसी चक्की में यूरिया को बारीक पीसता था, फिर मेटल पिघलाने वाली मशीन से उसे रिफाइन करता था। इसके बाद यूनिवर्सिटी की लैब से चोरी किए गए केमिकल मिलाए जाते थे। इस मिश्रण से शक्तिशाली विस्फोटक तैयार होता था।

    NIA ने 9 नवंबर को धौज गांव से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अगले ही दिन कश्मीर में उसके किराए के कमरे से 2558 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की। कुल मिलाकर करीब 2900 किलो विस्फोटक मिलने से साफ है कि, यह मॉड्यूल किसी बड़े हमले की तैयारी में था।

    टैक्सी ड्राइवर तक कैसे पहुंचा आतंकी नेटवर्क?

    पूरी कहानी की शुरुआत एक इंसानी आधार से हुई। टैक्सी ड्राइवर का बेटा हादसे में झुलस गया था और उसे अल-फलाह अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां डॉ. मुजम्मिल ने उसका इलाज किया और इसी बहाने ड्राइवर से नजदीकियां बढ़ाईं। फिर एक दिन “दहेज में मिली चक्की” बताकर वह आटा चक्की उसके घर रख आया। असल में यही चक्की विस्फोटक तैयार करने की सबसे अहम मशीन थी। बाद में NIA की टीम जब उसके घर पहुंची, तभी ड्राइवर को असली सच का पता चला।

    डॉक्टरों का ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’

    जांच से पता चला कि, यह गैंग बेहद संगठित और प्रोफेशनल तरीके से काम कर रहा था। उनके काम ऐसे बंटे हुए थे-

    1. डॉ. मुजम्मिल- भर्तीकर्ता और बम तैयार करने का मास्टरमाइंड

    • मुस्लिम युवाओं को आतंकी नेटवर्क में जोड़ना।
    • आटा चक्की में विस्फोटक तैयार करना।
    • अलग-अलग जगह किराए पर कमरे लेना।
    • सिम कार्ड, लॉजिस्टिक और फंडिंग की व्यवस्था।

    2. डॉ. शाहीन उर्फ ‘Madam Surgeon’- ब्रेनवॉश और महिला सेल की जिम्मेदार

    • आर्थिक मदद पहुंचाना।
    • भावनात्मक तरीके से युवाओं को उकसाना।
    • डायरी में “महिला आतंकी टीम” की लिस्ट तैयार।
    • तय करना कि किसे कितनी फंडिंग दी जाए।

    3. डॉ. उमर नबी- रणनीति और प्लानिंग का प्रमुख (हमले में मारा गया)

    • ब्लास्ट की योजना।
    • आतंकी गतिविधियों का कोर मैनेजमेंट।
    • मॉड्यूल के अंदर कनेक्शन को मजबूत करना।

    4. बाकी सदस्य- आदिल, इरफान, जसीर, आमिर

    • टेक्निकल सपोर्ट।
    • हथियार छिपाना।
    • वाहनों की व्यवस्था।
    • कश्मीर और हरियाणा में नेटवर्क फैलाना।

    यह मॉड्यूल डॉक्टरों की सफेद कोट की आड़ में चल रहा एक गहरा और संगठित आतंकी नेटवर्क था।

    डॉ. शाहीन की डायरी से प्लान का खुलासा

    जांच में यह भी सामने आया कि, डॉ. शाहीन महिलाओं की एक अलग आतंकी विंग तैयार करना चाहती थी। उसकी डायरी में कई लड़कियों के नाम लिखे मिले, जिन्हें ‘रेक्रूट’ करने की योजना थी। हालांकि, यह सेल पूरी तरह खड़ी नहीं हो सकी और बाद में उसने यह जिम्मेदारी डॉ. मुजम्मिल को सौंप दी।

    अस्पताल के अंदर भर्तियों का नेटवर्क?

    NIA इस एंगल की भी जांच कर रही है कि, क्या मरीजों और उनके परिवारों की कमजोरियां जानकर उन्हें नेटवर्क में भर्ती किया जाता था? कई संदिग्धों का कहना है कि डॉक्टर इलाज के दौरान ही संपर्क बढ़ाते थे।

    क्या दिल्ली ब्लास्ट सिर्फ एक शुरुआत थी?

    2900 किलो विस्फोटक मिलने के बाद जांच एजेंसियों को शक है कि-

    • यह मॉड्यूल दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में भी सक्रिय था।
    • कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली और UP में इसके कई ठिकाने हो सकते हैं।
    • कई और डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
    • अल-फलाह यूनिवर्सिटी में NIA, दिल्ली पुलिस, हरियाणा पुलिस और अब पंजाब पुलिस भी जांच कर रही है।
    • करीब 200 से ज्यादा डॉक्टर और कर्मचारी रडार पर हैं।
    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts