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मौत की आग का मिनट-टु -मिनट सच — 3:30 से 5:00 बजे तक कैसे राख बन गया पूरा घर!

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मौत की आग का मिनट-टु -मिनट सच — 3:30 से 5:00 बजे तक कैसे राख बन गया पूरा घर!
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर — एक भयावह अग्निकांड, जिसने कुछ ही मिनटों में एक खुशहाल परिवार को तबाही में बदल दिया। हर गुजरते मिनट के साथ आग और मौत का तांडव बढ़ता गया। घटनाक्रम की टाइमलाइन इस दिल दहला देने वाली त्रासदी की पूरी कहानी बयान करती है।

    तड़के 3:30 बजे — घर में आग की पहली चिंगारी भड़की। देखते ही देखते यह चिंगारी भयानक लपटों में बदल गई। रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। धुएं ने पूरे घर को अपनी गिरफ्त में ले लिया, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो गया।

    इस भयावह माहौल में भी मनोज ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पत्नी सुनीता और बेटों सौरभ, सौमिल व हर्षित को किसी तरह पहली मंजिल तक पहुंचाया और बाकी लोगों को बचाने के लिए वापस लौट पड़े। सुनीता ने उनका हाथ पकड़कर रोकने की कोशिश की, लेकिन मनोज परिवार को सुरक्षित स्थान (जाली के पास) छोड़कर फिर आग में कूद पड़े। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। तेज धुएं और भड़कती आग ने उनका रास्ता रोक लिया। घुटने का हाल ही में ऑपरेशन होने के कारण वे ज्यादा देर तक संघर्ष नहीं कर सके और बेहोश होकर गिर पड़े।

    सुबह 4:01 बजे — आखिरकार फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। हर सेकंड अब भारी पड़ रहा था।

    4:05 बजे — पुलिस का सेक्टर अधिकारी मौके पर पहुंच गया, लेकिन आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि हालात काबू से बाहर होते जा रहे थे। इसी दौरान सामने स्थित महावीर रिजेंसी मल्टी में रहने वाले अर्पित जैन और अपूर्व जैन ने सबसे पहले आग की लपटें देखीं और तुरंत डायल-112 पर कॉल किया। उन्होंने बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें तेजी से पहली मंजिल तक पहुंच गईं। पानी के पाइप भी बेअसर साबित हुए।

    सौरभ का दर्द छलका — “मैं लगातार मदद मांग रहा था। मैंने बताया कि सिमरन (पत्नी) और पापा अंदर फंसे हैं, लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी…”

    पड़ोसियों के अनुसार, डायल-112 से जवाब मिला कि फायर ब्रिगेड को आने में 15 मिनट लगेंगे। इस पर रहवासियों ने गुहार लगाई — मैडम, 15 मिनट में तो सब जलकर खाक हो जाएंगेसिलेंडर फटने की आवाज सुनिए…” लेकिन आरोप है कि ऑपरेटर ने फोन काट दिया। उस वक्त हालात इतने भयावह थे कि बिजली के पोल से भी आग बरसती नजर आ रही थी।

    4:19 बजे — गांधी हाल फायर स्टेशन से पहली फायर ब्रिगेड की गाड़ी रवाना हुई। लेकिन तब तक आग रौद्र रूप ले चुकी थी।

    अर्पित जैन के मुताबिक, करीब पौन घंटे बाद फायरकर्मी पहुंचे। तब तक मनोज का घर आग का गोला बन चुका था। पानी के टैंकर भी कम पड़ गए। धमाकों और भीषण गर्मी के कारण 20 फीट दूर खड़े रहना भी मुश्किल हो गया था।

    लगातार धमाके और तबाही — घर में रखे गैस सिलेंडर और केमिकल ड्रम आग की चपेट में आकर एक-एक कर फटने लगे। हर धमाके के साथ आग और भड़कती गई और मकान के हिस्से क्षतिग्रस्त होते चले गए।

    बिजली विभाग के जोन प्रभारी उमेश सिंह के अनुसार, एक चिंगारी से सबसे पहले पर्दों ने आग पकड़ी, फिर फर्नीचर और अन्य ज्वलनशील सामग्री ने आग को विकराल बना दिया। घर में हाल ही में रिनोवेशन हुआ था और भारी मात्रा में लकड़ी व केमिकल का इस्तेमाल किया गया था, जिससे आग तेजी से फैलती गई। लोकल चार्जिंग और गाड़ी के गर्म होने की आशंका भी जताई गई है। पोर्च में खड़े दोपहिया वाहन भी पूरी तरह जलकर खाक हो गए।

    सुबह 5:00 बजे — आग के बीच से पहला शव निकाला गया और एमवायएच भेजा गया। यह वह पल था, जब उम्मीदें पूरी तरह टूट चुकी थीं।

    इसके बाद मोती तबेला, लक्ष्मीबाई, जीएनटी मार्केट और सांवेर रोड फायर स्टेशन से भी गाड़ियां बुलाई गईं। करीब 1 लाख 70 हजार लीटर पानी डालकर आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

    घटना के बाद फोरेंसिक टीम और बिजली कंपनी के विशेषज्ञ मौके पर पहुंचे। जले हुए तार, स्विच बोर्ड और अन्य अवशेष जब्त किए गए। बताया जा रहा है कि दो महीने पहले ही मकान का रिनोवेशन कराया गया था और इसकी खूबसूरती इतनी थी कि लोग फोटो खींचने आते थे — लेकिन अब वही घर राख के ढेर में बदल चुका है।

    लापरवाही के आरोप — रहवासी नमित माहेश्वरी ने फायर ब्रिगेड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय पर टैंकर पहुंच जाते, तो कई जानें बच सकती थीं। एडिशनल डीसीपी जोन-1 मीना चौहान से भी इस संबंध में शिकायत की गई है।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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