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मासूम समेत फांसी के फंदे पर लटके मिले दंपति के शव, पीएम रिपोर्ट के हो सकता है खुलासा

मासूम समेत फांसी के फंदे पर लटके मिले दंपति के शव, पीएम रिपोर्ट के हो सकता है खुलासा
जबलपुर। रामपुर छापर में मासूम के साथ दंपति के शव रविवार को फांसी के फंदे पर लटके मिले हैं। घटना गोरखपुर थाने की है और पुलिस मौके पर पहुंची है। शुरूआती जांच में पुलिस का मानना है कि बच्चे को फंदे पर टांगने के बाद दंपति ने आत्महत्या की है। रविवार दोपहर मामले का पता तब लगा, जब मोहल्ले में ही रहने वाले बड़े भाई ने दरवाजा तोड़कर देखा। स्थानीय लोगों के मुताबिक परिवार का मकान दो दिन से बंद था। आखिरी बार सभी को शुक्रवार 23 जून की रात देखा गया था। रविवार दोपहर मामले का पता लग सका। मामले में सीएसपी प्रतिष्ठा सिंह ने बताया कि राजेश बर्मन (40), पूनम बर्मन (35) और उनके बेटे आर्यन बर्मन (10) के शव फंदे पर मिले। पुलिस मामले की बारीकी से जांच कर रही है। दंपत्ति ने बच्चे के साथ आत्महत्या क्यों की इसका आसपास के लोगों के अलावा परिजनों से पूछताछ करके बताया लगाया जा रहा है।

नहीं मिला सुसाइड नोट

मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। अभी आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं है। जांच की जा रही है। एफएसएल टीम ने भी छानबीन की है। परिवार को आखिरी बार शुक्रवार रात को देखा गया था। आत्महत्या को कितना समय हुआ है? यह पोस्टमॉर्टम के बाद रिपोर्ट आने पर पता चल पाएगा। रविशंकर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) थे।

शुक्रवार को ही नरसिंहपुर से लौटे थे

रविशंकर के बड़े भाई संतोष बर्मन ने बताया कि शुक्रवार को तीनों नरसिंहपुर से लौटे थे। पूनम का मायका नरसिंहपुर में है। इसी रात इनका बेटा मेरी बेटी के साथ खेलने भी आया था। इसके बाद इनका दरवाजा बंद हो गया। शनिवार सुबह मां ने दरवाजा खटखटाया। कोई नहीं उठा। सोचा कि दूर का सफर कर आए हैं, थके होंगे, इसलिए सो रहे होंगे। शाम को भी दरवाजा खटखटाया। ये नहीं उठे। हालांकि क्षेत्रीय लोगों ने दबी जुबान से बताया कि रवि पर काफी कर्ज था।

आज मैहर जाने का था प्लान

रविशंकर को मिलाकर परिवार में चार भाई-तीन बहने हैं। वे तीसरे नंबर के भाई थे। डेढ़ साल पहले पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। रविशंकर जबलपुर में काम करते थे, लेकिन काम के सिलसिले में अक्सर आसपास के जिलों में भी जाते रहते थे। उनके भाई संतोष ने बताया कि रविवार को सभी का मैहर जाने का प्लान था। 10 साल का आर्यन 5वीं क्लास में पढ़ता था। भाई को बीच-बीच में पैसों की थोड़ी-बहुत दिक्कत आती भी थी, तो बहन मदद करती थी।
Arun Siddhnath
By Arun Siddhnath

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