दमोह में पुरातत्व स्थल कनोरा तक पहुंचना मुश्किल, मिट चुके बोर्ड और बदहाल रास्ते बने बाधा

दमोह। जिले के कनोरा में स्थित राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्वीय स्थल तक पहुंचने के लिए दो मार्ग हैं, लेकिन दोनों ही रास्तों पर जरूरी सुविधाओं और संकेतकों का अभाव होने से पर्यटकों तथा इतिहास प्रेमियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुरातात्विक महत्व के इस स्थल की ओर जिम्मेदार विभाग की निगरानी भी नजर नहीं आ रही है।कनोरा पहुंचने के लिए एक मार्ग बरी की ओर से है। मुख्य सड़क मार्ग पर यहां पुरातत्व स्थल संबंधी बोर्ड तो लगा है, लेकिन उस पर लिखी जानकारी पूरी तरह मिट चुकी है। ऐसे में बाहर से आने वाले लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि स्थल तक किस दिशा में जाना है। दूसरा मार्ग सादपुर की ओर से है। यहां कुछ दूरी पर दो कच्चे रास्ते निकलते हैं, लेकिन किसी भी मार्ग पर दिशा-सूचक बोर्ड नहीं लगाया गया है। ऐसे में ग्रामीणों से पूछे बिना सही रास्ते का पता लगाना मुश्किल है।डोलपुरा की ओर से कनोरा तक जाने वाला कच्चा मार्ग भी गड्ढों से भरा है। हालत यह है कि चार पहिया वाहन से यहां पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

फेंसिंग ने बढ़ाई परेशानी
कनोरा पहुंचने के बाद प्राचीन स्मारक तक जाने वाले मार्ग पर फेंसिंग कर दी गई है, जिससे स्मारक तक पहुंचना और कठिन हो गया है। जहां फेंसिंग समाप्त होती है, वहां एक छोटा रपटा है और नीचे की ओर उतरकर किसी तरह स्मारक तक पहुंचना पड़ता है। वहीं प्राचीन स्मारक का प्रवेश द्वार भी मरम्मत की बाट जोह रहा है। विशेष बात यह है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का उप मंडल कार्यालय दमोह में शुरू हो चुका है। इसके बावजूद जिले के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

पीपुल्स समाचार ने दिलाया था ध्यान
कुछ समय पूर्व कोडल के प्राचीन स्मारक पर अस्थायी छत बनाए जाने का मामला भी सामने आया था, जिसे पीपुल्स समाचार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अब कनोरा में पहुंच मार्ग, संकेतक, फेंसिंग और प्रवेश द्वार की स्थिति सवाल खड़े कर रही है। इतिहास और पुरातत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों को यदि पर्यटकों के लिए विकसित करना है तो सबसे पहले वहां तक सुगम पहुंच, स्पष्ट दिशा-सूचक बोर्ड और स्मारकों का संरक्षण जरूरी है। उम्मीद है कि एएसआई का दमोह उप मंडल कनोरा सहित जिले के अन्य पुरातात्विक स्थलों की स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कराएगा।
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