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टाइगर स्टेट पर संकट :मप्र ने तीन माह में खो दिए 20 बाघ, देश में 46 की मौत

मप्र में बीते तीन माह में 20 बाघों की मौत हो गई है। इस अवधि में देश में मृत 46 बाघों में से लगभग आधी संख्या मप्र होने से टाइगर स्टेट संकट में नजर आ रहा है। यहां हर चौथे- पांचवें दिन में एक बाघ खत्म हो रहा है।
मप्र ने तीन माह में खो दिए 20 बाघ, देश में 46 की मौत
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    संजय कुमार तिवारी’ जबलपुर। मप्र में बाघों की मौत का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। साल 2026 के पहले तीन महीनों (7 जनवरी से 6 अप्रैल) के बीच ही प्रदेश में 20 बाघों की मौत हो चुकी है। यानी औसतन हर चौथे-पांचवें दिन एक बाघ की जान गई। अगर हम इसे औसत में देखें तो प्रदेश में ही 43.47 प्रतिशत बाघों की मौत हुई है। वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार प्रदेश में 785 बाघ हैं, जो देश की कुल संख्या का 21.38% हैं। लेकिन मौजूदा हालात ने ‘टाइगर स्टेट’ की पहचान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी अवधि में देशभर में सिर्फ 46 बाघों की मौत हुई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर कुल बाघों का 1.29 प्रतिशत है। यानी मप्र में मौत की रफ्तार ज्यादा है।

    देरी से मिल रहे शव

    अधिकांश मामलों में बाघों के शव देरी से मिल रहे हैं, जिससे मौत के कारणों की जांच प्रभावित होती है। सतपुड़ा में 23 दिन बाद शव मिला था। उमरिया में शव 2 सप्ताह बाद मिला।  कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में भी बाघिन मृत पाई गई।

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    शिकार व करंट बन रहे कारण

    मप्र में इस साल मरने वाले बाघों में से आधे से ज्यादा की मौत मानवजनित कारणों से जुड़ी पाई गई है। 

    • छिंदवाड़ा में रेडियो कॉलर लगे बाघ का शिकार
    • उमरिया में करंट से दो बाघों की मौत।
    • चंदिया रेंज में भी करंट से मौत की पुष्टि 
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    उमरिया सबसे ज्यादा प्रभावित

    20 में से 6 बाघों की मौत उमरिया जिले में हुई है, जिससे यह क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील बन गया है।

    हाईकोर्ट की सख्ती

    2025 में 55 बाघों की मौत के बाद लगातार बढ़ते मामलों पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।

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    कुछ ही मामले शिकार से जुड़े हैं

    बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है, इसलिए मौत के आंकड़े अधिक दिख रहे हैं। बाघों की मौतें मानवजनित कारणों से जुड़ी हैं। आपसी संघर्ष, स्वाभाविक मौत और बीमारी मुख्य कारण है। कुछ ही मामले शिकार से जुड़े हैं।

    पीके वर्मा, उपसंचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व

    बाघों के लिए पर्याप्त क्षेत्र नहीं

    बांधवगढ़ में 165 से अधिक बाघ हैं। 1 बाघ को कम से कम 10 वर्ग किमी का क्षेत्र चाहिए। ऐसे में यहां 1650 वर्ग किमी का एरिया बाघों को चाहिए। जबकि यहां कोर जोन और बफर जोन मिलाकर 1500 वर्ग किमी है।

    एनएस कोरचे, वन्य जीव एक्सपर्ट रिटायर्ड एसडीओ

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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