Naresh Bhagoria
3 Jan 2026
Naresh Bhagoria
3 Jan 2026
Aakash Waghmare
3 Jan 2026
Manisha Dhanwani
3 Jan 2026
संतोष चौधरी, भोपाल। प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियां 6,044 करोड़ के घाटे की भरपाई उपभोक्ताओं से करने की तैयारी में हैं। इसमें से 3,451 करोड़ रुपए का घाटा बीते नौ साल का है। कंपनियों ने इसके लिए मप्र विद्युत नियामक आयोग से बिजली दर में 10.19 प्रतिशत की वृद्धि की अनुमति मांगी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की टैरिफ पिटीशन के मुताबिक, कुल 6,044 करोड़ में से 3,451 करोड़ रुपए 2014 से 2023 तक की सत्यापन याचिका का है। यानी यह पुराना घाटा है। वहीं 2026-27 का अनुमानित घाटा 2, 593 करोड़ है। बिजली कंपनियों के अफसर कहते हैं कि पिटीशन आयोग में विचाराधीन है। इसलिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं। अब आयोग ने जनसुनवाई के लिए उपभोक्ताओं से दावे-आपत्तियां बुलाई हैं।
कंपनियां उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर फ्री लगाने का दावा कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर स्मार्ट मीटर के लीज प्रभार के नाम पर 514 करोड़ भी वसूलने की तैयारी में हैं। इधर, मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने अपने प्रस्ताव में स्वयं बिजली खरीदने के लिए 300 करोड़ की अनुमति भी मांगी है।

पूर्व क्षेत्र, जबलपुर 24 फरवरी
पश्चिम क्षेत्र, इंदौर 25 फरवरी
मध्य क्षेत्र, भोपाल 26 फरवरी
पूर्व क्षेत्र 18,540 1,714
मध्य क्षेत्र 20,726 1,916
पश्चिम क्षेत्र 26,108 2,414
कुल 65,374 6,044
(राशि करोड़ रुपए में)
बिजली कंपनियां हर साल बिजली दरों में इजाफा करती हैं। कंपनियां बिजली चोरी नहीं रोक पा रही हैं, इसकी भरपाई भी उन ईमानदार उपभोक्ताओं से की जाती है, जो नियमित बिल का भुगतान करते हैं। कंपनियों को चाहिए कि अपनी तकनीक में सुधार करें। पहले बताया गया था कि स्मार्ट मीटर की कोई राशि नहीं वसूली जाएगी। टैरिफ को लेकर नियामक आयोग में आपत्तियां लगाएंगे।
हरवीर पाटकर, उपभोक्ता, बागमुगालिया,भोपाल
बिजली कंपनियों की 2014 से 2023 तक की सत्यापन याचिका की जो राशि गहन परीक्षण के बाद नियामक आयोग अस्वीकार कर चुका है, अब उसकी वसूली औचित्यहीन और अनुचित है। इस अवधि में कंपनियों ने बिजली खरीदी में अनाप-शनाप खर्च किया है। कंपनियों का प्रबंधन फेल है। यदि वह कार्यक्षमता में सुधार करें तो न घाटा होगा और न हर साल दरें बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी।
राजेंद्र अग्रवाल, बिजली मामलों के जानकार, जबलपुर
एमएसएमई और इंडस्ट्री के लिए यह ठीक नहीं है। बिजली दरें बढ़ाने का विपरीत असर पड़ेगा। कंपनियों को अपनी कार्यक्षमता में सुधार लाना चाहिए न कि अपनी गलतियों की भरपाई उपभोक्ताओं से करें। जब नियामक आयोग पुरानी वसूली को पहले ही नकार चुका है, तो इसकी वसूली उचित नहीं है। हम आयोग में आपत्तियां लगाएंगे।
सीबी मालपानी, वाइस प्रेसिडेंट, फेडरेशन ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, मप्र