इंदौर में दूषित जल आपूर्ति के गंभीर मामले को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को उनके पद से हटा दिया गया है। वहीं शनिवार को सरकार ने 2014 बैच के IAS अधिकारी क्षितिज सिंघल को नया निगमायुक्त बनाया है। इस प्रशासनिक कार्रवाई को शहर में हाल ही में सामने आई गंदे पानी की आपूर्ति, उससे बिगड़ी जनस्वास्थ्य स्थिति और बढ़ते जन आक्रोश से जोड़कर देखा जा रहा है।
सिंघल की मध्य प्रदेश में पहचान एक जुझारू अधिकारी के रूप में है। उनकी पत्नी शीतला पटले भी आईएएस अधिकारी है। वे वर्तमान में सिवनी कलेक्टर के पद पर तैनात है। जिसके बाद सिंघल की अब नई जिम्मेदारी इंदौर के नए निगमायुक्त के रूप में मिली है। वहीं हाईकोर्ट में इंदौर दूषित पानी मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
अपने कामों के अलावा IAS क्षितिज सिंघल उज्जैन नगर-निगम आयुक्त सहित बिजली कंपनी में कार्य कर चुके हैं। हालांकि इस बीच वे कोर्ट मैरिज के कारण चर्चा में भी आए। 1 जनवरी को उन्होंने पत्नी और IAS अधिकारी शीतला पटेला के साथ कोर्ट मैरिज की थी। यह मैरिज बिना किसी मुहुर्त के तहत की गई थी। दूसरी ओर प्रशासनिक गलियारों में उनकी छवि बेबाक अधिकारी के रूप में सामने आती है। कहा जाता है कि उनकी कार्यशैली नेताओं से मेल नहीं खाती।
बीते कुछ समय से इंदौर के कई इलाकों में नलों से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें सामने आ रही थीं। लोगों ने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक अपनी नाराजगी जाहिर की थी। जल आपूर्ति की इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की समीक्षा की और जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
इंदौर निगमायुक्त की रेस में मध्य प्रदेश शासन की तीन महिला IAS अधिकारी के नाम भी होड़ में थे। इनमें शाजापुर कलेक्टर ऋतु बाफना, आदिति गर्ग कलेक्टर मंदसौर और सामाजिक न्याय विभाग की डिप्टी सेक्रेटरी अंकिता धाकरे का नाम भी शामिल था। लेकिन सीएम डॉ. मोहन यादव का कहना है कि इंदौर में एक वरिष्ठ अधिकारी की जरूरत है। जिसके बाद बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा और म. प्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी क्षितिज सिंघल के नाम ने जोर पकड़ा।