CM डॉ. मोहन यादव ने किया ‘हैंडलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ, महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण, घर बैठे कमाई का मिलेगा मौका

उज्जैन में हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने और पारंपरिक कला को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में ‘हैंडलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ किया। इस सेंटर का उद्देश्य स्थानीय महिलाओं और बुनकरों को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ना और पारंपरिक हथकरघा कला को आगे बढ़ाना है।
सरकार की योजना के अनुसार सेंटर में महिलाओं को करीब 6 महीने का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाएं घर से ही चरखे और हथकरघे का काम कर सकेंगी। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा और करीब 15 से 20 हजार रुपए महीने तक की आय होने की उम्मीद जताई गई है।
उज्जैन में फिर शुरू होगा कपड़ा निर्माण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में एक बार फिर कॉटन और दूसरे कपड़ों के निर्माण का काम शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही आने वाले समय में रेशम उत्पादन को भी बढ़ावा देने की योजना है। हथकरघा और लूम के काम को बढ़ाने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे महिलाओं, बुनकरों और पारंपरिक कारीगरों को अपने ही क्षेत्र में काम मिल सकेगा।
महिलाओं को मिलेगा 6 महीने का प्रशिक्षण
‘हैंडलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में महिलाओं को करीब छह महीने का बुनियादी हथकरघा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को चरखा चलाने, हथकरघा संचालित करने, बुनाई करने और कपड़ा तैयार करने की तकनीक सिखाई जाएगी। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अपने घर से भी इस काम को आगे बढ़ा सकेंगी। इससे उन्हें रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाने की जरूरत कम होगी और वे अपने परिवार के साथ रहते हुए आय अर्जित कर सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने खुद चलाया चरखा
उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सेंटर का निरीक्षण किया और वहां मौजूद महिलाओं से बातचीत की। उन्होंने महिलाओं से हथकरघा उद्योग और प्रशिक्षण से जुड़ी जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने खुद भी चरखा चलाया।
उन्होंने सेंटर से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रशिक्षण की प्रक्रिया लगातार जारी रहनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं और अन्य लोगों को इसका लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेंटर की पहली मंजिल पर लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं। इससे यहां ज्यादा संख्या में लोगों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जा सकेगा।
सेंटर में बने उत्पादों के लिए बनेगा शोरूम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सेंटर के भूतल पर तैयार किए जाने वाले हथकरघा उत्पादों की बिक्री के लिए शोरूम बनाने की बात भी कही। इसका उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण के बाद तैयार होने वाले उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना है। अगर स्थानीय स्तर पर तैयार कपड़ों और अन्य उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है, तो महिलाओं और बुनकरों को उनके काम का बेहतर मूल्य मिल सकता है।
स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता
हैंडलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। महिलाएं प्रशिक्षण लेकर घर से चरखा और हथकरघा का काम कर सकती हैं। इससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का मकसद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करना है।
‘मृगनयनी’ को मिला डिजिटल प्लेटफॉर्म का नया रूप
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत संचालित मृगनयनी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मृगनयनी देश का पहला सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम यानी PSU के स्वामित्व वाला एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। इसके जरिए प्रदेश के कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार
हथकरघा से जुड़े उत्पादों की सबसे बड़ी चुनौती बाजार तक पहुंच की होती है। कई बार कारीगर बेहतर उत्पाद तैयार करते हैं, लेकिन उन्हें सही ग्राहक और उचित कीमत नहीं मिल पाती। डिजिटल प्लेटफॉर्म इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। स्थानीय उत्पादों को ऑनलाइन बाजार मिलने से उनकी पहुंच देश के अलग-अलग हिस्सों तक हो सकती है। इससे उज्जैन और मध्यप्रदेश के पारंपरिक कपड़ों, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
खादी को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में बने खादी के कपड़ों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में खादी ग्रामोद्योग के मुनाफे में करीब 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
धार में बनेगा देश का बड़ा औद्योगिक पार्क
मुख्यमंत्री ने इस दौरान धार में बनने वाले पीएम मित्रा पार्क का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष धार में पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास किया गया था। इसे देश के बड़े औद्योगिक पार्कों में शामिल किए जाने की योजना है। कपड़ा उद्योग से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट और स्थानीय स्तर पर हथकरघा केंद्र जैसे प्रयास एक-दूसरे को मजबूत कर सकते हैं। इससे प्रदेश में कपड़ा उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
सांसद अनिल फिरोजिया ने भी जताई खुशी
कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से उज्जैन को एक और बड़ी सौगात मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सेंटर के जरिए महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनेंगी।











