जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व के कन्हारी वन परिक्षेत्र में रविवार एक मादा बाघ का शव मिलने के बाद हड़कम्प मच गया। कन्हारी के करोंदावारे रेंज में पहुंची पार्क की टीम ने घटनास्थल को सील करते हुए शिकार की आशंका से डॉग स्क्वायड से सर्चिंग शुरू कराई। वहीं डॉक्टरों की टीम ने जब शव का परीक्षण किया तो इसमें बाघिन के सभी अंग सुरक्षित थे। प्रथम दृष्टया में बाघिन की मौत बाघों के बीच हुए आपसी संघर्ष की लड़ाई में होना सामने आया है।
पार्क प्रबंधन के मुताबिक बाघिन का पोस्टमार्टम डॉ. संदीप अग्रवाल, वन्यप्राणी चिकित्सक, कान्हा टाइगर रिजर्व, डॉ. आरएम भुरमूदे, पशु चिकित्सक, मंडला और डॉ. सुनील गोयल पशु चिकित्सालय, बैहर ने किया। डॉक्टरों की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, मृत बाघ के शरीर पर चोट और घाव के निशान पाए गए हैं, जिसमें यह सामने आया कि मादा बाघ को अन्य बाघ द्वारा मारा गया।
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निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भस्मीकरण की कार्यवाही NTCA प्रतिनिधि जैनब खान एवं चन्द्रेश खरे, कान्हा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रवीन्द्रमणि त्रिपाठी, सहायक संचालक सूरज सिंह सेन्द्राम, वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. संदीप अग्रवाल, तहसीलदार शंकर मेरावी, सरपंच श्यामवती उइके की मौजूदगी में किया गया।
सोहागपुर के पास स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों के आपसी संघर्ष में एक शावक की मौत हो गई। यह घटना वन परिक्षेत्र मटकुली के नयाखेड़ा बीट के कक्ष क्रमांक 460 में 4 अप्रैल 2026 की शाम सामने आई। उस समय जंगल में दो बाघों के जोर-जोर से दहाड़ने की आवाज सुनाई दी थी। आवाज सुनने के बाद वनरक्षक नयाखेड़ा, परिक्षेत्र सहायक और अन्य कर्मचारियों ने इलाके में गश्त शुरू की। रात में मौके के पास पहुंचने पर एक बाघ का शावक मृत अवस्था में मिला। अंधेरा होने के कारण पूरी जांच अगले दिन की गई और रात भर इलाके की निगरानी की गई। 5 अप्रैल को अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान बाघों के आपसी संघर्ष के स्पष्ट सबूत मिले और शावक का शव बरामद किया गया। आसपास अन्य बाघों की मौजूदगी के भी निशान मिले।