Peoples Update Special :शहरों से हर साल निकल रहा 2 लाख मीट्रिक टन सिंगल यूज प्लास्टिक कचरा

अशोक गौतम,भोपाल। प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू हुए चार साल बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर मामूली दिखाई दे रहा है। राज्य के 400 से अधिक शहरों से हर साल करीब 2 लाख मीट्रिक टन(एमटी) सिंगल यूज प्लास्टिक कचरा निकल रहा है। नगरीय निकाय न तो इसकी बिक्री रोक पा रहे हैं और न ही उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सके हैं। बाजारों में आज भी कैरी बैग, प्लास्टिक प्लेट, कप, गिलास सहित अन्य डिस्पोजेबल सामग्री 75 से 120 माइक्रोन तक बिक रही है। बाजारों से लेकर बड़े आयोजनों तक इनका उपयोग लगातार जारी है। यह कचरा नालियों, सड़कों और खाली प्लॉटों में जमा होकर गंभीर समस्या बन रहा है। इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ रहा है।

क्या है सिंगल यूज प्लास्टिक
- एक बार उपयोग के बाद फेंकी जाने वाली प्लास्टिक सामग्री
- कैरी बैग, प्लेट, कप, गिलास, स्ट्रॉ, कटलरी
- मिठाई के डिब्बे, झंडे, बैनर, थर्माकोल सजावटी सामान
मुख्य समस्याएं
- सस्ती और आसानी से उपलब्ध प्लास्टिक
- विकल्पों की कमी
- निगरानी और सख्ती का अभाव
- लोगों की आदतों में बदलाव नहीं
समाधान के रास्ते
- सख्त प्रवर्तन और नियमित जांच
- बायोडिग्रेडेबल विकल्पों को बढ़ावा
- स्थानीय स्तर पर कचरा संग्रह और रिसायक्लिंग
- जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन पर जोर
शहरवार प्लास्टिक वेस्ट
- इंदौर 23,100 एमटी
- भोपाल 8,400 एमटी
- जबलपुर 7,500 एमटी
- ग्वालियर 5,000 एमटी
जुर्माना भी बेअसर
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, प्रदेश में 40 हजार से अधिक जागरूकता अभियान चलाए गए, लेकिन प्रतिबंधित प्लास्टिक की बिक्री पर रोक नहीं लगी। एक साल में 1.21 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला गया, फिर भी स्थिति पहीं सुधरी। इधर,इस कचरे के निपटान के लिए 15 सीमेंट कंपनियों से अनुबंध किया गया है। एक वर्ष में 1.98 लाख एमटी कचरा इन कंपनियों को दिया गया, जहां इसका उपयोग ईंधन के रूप में हो रहा है।
लोगों को जागरूक होना होगा
शहरों में सामान्य तौर पर सबसे ज्यादा शिक्षित लोग रहते हैं। सिंगल यूज प्लाटिक अकेले पुलिस और नगर निगम की कार्रवाई से तब तक बंद नहीं होगी जब तक कि लोग इसके प्रति जागरूक नहीं होंगे। सिंगल यूज प्लास्टिक कितना हानिकारक है, सब को पता है। प्लास्टिक के पार्टिकल पानी के साथ मिलकर कैंसर तथा पेट जनित बीमारियां पैदा करते हैं।
एमएल पटेल, रिटायर्ड अधीक्षण यंत्री, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड












