पुतिन की इस यात्रा से करीब एक सप्ताह पहले ही चीनी मीडिया में हलचल शुरू हो गई थी। वहां की रिपोर्टों में कहा गया कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका और भारत के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। चीन सरकार समर्थित वेबसाइट द पेपर ने टिप्पणी की कि अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत के आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा की जरूरतें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए रूस के साथ उसकी ऊर्जा साझेदारी को कमजोर करना आसान नहीं है।
चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने अपने यात्रा प्रिव्यू में लिखा था कि पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर टैरिफ लगाकर दबाव बना रहा है। साथ ही, यह दौरा अमेरिका, रूस, यूक्रेन और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित ‘पीस प्लान’ पर जारी अहम बातचीत के बीच भी हो रहा है। शिन्हुआ के अनुसार, यदि अमेरिका व भारत के रिश्तों में खिंचाव बढ़ता है, तो भारत अपने रूसी सहयोग को और गहरा कर सकता है और कई क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।