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Putin Visit India :पुतिन की यात्रा पर चीनी मीडिया ने कहा-अमेरिकी दबाव के बीच मिल रहे भारत-रूस

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देश नजर रखे हुए हैं, लेकिन भारत के पड़ोसी देश चीन का मीडिया भी इस यात्रा को लेकर खास स्टडी कर रहा है।
पुतिन की यात्रा पर चीनी मीडिया ने कहा-अमेरिकी दबाव के बीच मिल रहे भारत-रूस
image Source : Social Media
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी दो दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। गुरुवार रात उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ डिनर दौरान अनौपचारिक बातचीत की, जबकि शुक्रवार को औपचारिक स्वागत के बाद दोनों देशों ने कोऑपरेशन, माइग्रेशन, अस्थायी श्रमिक गतिविधियों सहित कई अहम क्षेत्रों में नए समझौतों पर सहमति जताई।

    एक हफ्ते पहले से हलचल

    पुतिन की इस यात्रा से करीब एक सप्ताह पहले ही चीनी मीडिया में हलचल शुरू हो गई थी। वहां की रिपोर्टों में कहा गया कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका और भारत के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। चीन सरकार समर्थित वेबसाइट द पेपर ने टिप्पणी की कि अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत के आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा की जरूरतें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए रूस के साथ उसकी ऊर्जा साझेदारी को कमजोर करना आसान नहीं है।

    मुख्य मुद्दों पर निगाह

     बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी वेबसाइट गुआनचा ने लिखा कि हथियारों की खरीद इस यात्रा का प्रमुख विषय है। रिपोर्ट में ब्लूमबर्ग के हवाले से दावा किया गया कि भारत और रूस सुखोई-57 फाइटर जेट, एस-500 एयर डिफेंस व एंटी-मिसाइल सिस्टम की संभावित खरीद पर उत्सुक हैं। ऊर्जा सहयोग के मोर्चे पर भी भारत रूस के सुदूर पूर्व में स्थित सखालिन-1 तेल एवं गैस परियोजना में ओएनजीसी की 20% हिस्सेदारी फिर से बहाल कराने की दिशा में प्रयास कर सकता है।

    पीस प्लान के बीच कूटनीति

    चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने अपने यात्रा प्रिव्यू में लिखा था कि पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर टैरिफ लगाकर दबाव बना रहा है। साथ ही, यह दौरा अमेरिका, रूस, यूक्रेन और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित ‘पीस प्लान’ पर जारी अहम बातचीत के बीच भी हो रहा है। शिन्हुआ के अनुसार, यदि अमेरिका व भारत के रिश्तों में खिंचाव बढ़ता है, तो भारत अपने रूसी सहयोग को और गहरा कर सकता है और कई क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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