बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए बहुचर्चित नसबंदी कांड में आखिरकार अदालत का फैसला सामने आ गया है। 2014 में हुए इस दर्दनाक मामले में 12 महिलाओं की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। अब लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित डॉक्टर को सजा सुनाई है, जिससे पीड़ित परिवारों को आंशिक न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश शैलेष कुमार केतारप की अदालत ने डॉ. आरके गुप्ता को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई है। अतिरिक्त लोक अभियोजक देवेंद्र राव के मुताबिक, अदालत ने प्रत्येक मृत महिला के मामले में 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी डॉक्टर को छह महीने और एक महीने की सजा के साथ मामूली जुर्माना लगाया गया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
यह मामला 8 नवंबर 2014 का है, जब बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के सकरी गांव के पास पेंडारी स्थित एक निजी अस्पताल में नसबंदी शिविर आयोजित किया गया था। इस शिविर में आसपास के ग्रामीण इलाकों से 83 महिलाओं को ऑपरेशन के लिए लाया गया था। अभियोजन के अनुसार, उस समय जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. गुप्ता ने महज तीन घंटे में सभी सर्जरी पूरी कर दीं। ऑपरेशन के बाद कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, इसके बाद उन्हें छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में भर्ती किया गया था। इलाज के दौरान 12 महिलाओं की मौत हो गई थी।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि ऑपरेशन में लापरवाही से सेप्टीसीमिया संक्रमण होने और ऑपरेशन के बाद दी गईं ‘सिप्रोसिन’ दवा में चूहामार रसायन की मिलावट को लेकर भी विवाद सामने आया था। जांच के बाद, पुलिस ने डॉ. गुप्ता और दो दवा आपूर्ति कंपनियों महावर फार्मा कंपनी के रमेश और सुमित महावर, और कविता फार्मास्यूटिकल्स के राकेश, राजेश व मनीष खरे समेत पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, कोर्ट ने दवा कंपनियों से जुड़े पांचों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।