IT सेक्टर में फिर बड़ी हलचल:Cognizant निकालेगी 15 हजार कर्मचारी, भारत पर सबसे ज्यादा असर!

रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी 12 हजार से 15 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। इस फैसले के चलते कंपनी को भारी मुआवजा भी देना पड़ेगा। भारत में कर्मचारियों की संख्या अधिक होने से यहां असर ज्यादा रहेगा। नई AI आधारित रणनीति के तहत कंपनी लागत कम करने पर फोकस कर रही है।
छंटनी का बड़ा प्लान तैयार
खबरों के अनुसार कॉग्निजेंट प्रोजेक्ट लीप के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इस योजना के अंतर्गत 12,000 से 15,000 कर्मचारियों की छंटनी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर संख्या की पुष्टि नहीं की है, लेकिन संकेत साफ हैं कि यह कटौती बड़े पैमाने पर होगी। आईटी सेक्टर में पहले से चल रही सुस्ती के बीच यह खबर कर्मचारियों की चिंता बढ़ाने वाली है।
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भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों ?
कंपनी में कुल 3.5 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 2.5 लाख भारत में हैं। ऐसे में छंटनी का सबसे बड़ा असर भारतीय वर्कफोर्स पर पड़ना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम सैलरी और कम सेवरेंस कॉस्ट के कारण कंपनियां भारत में कटौती करना आसान समझती हैं। यही वजह है कि इस बार भी भारत में नौकरी जाने का खतरा ज्यादा है। यह स्थिति भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
कंपनी करोड़ों रुपए करेगी खर्च
रिपोर्ट्स के अनुसार इस छंटनी प्रक्रिया में कंपनी को 230 मिलियन से 320 मिलियन डॉलर तक खर्च करना पड़ सकता है। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 1900 से 2600 करोड़ रुपये के बीच बैठती है। यह खर्च कर्मचारियों को दिए जाने वाले सेवरेंस पैकेज के रूप में होगा। इससे साफ है कि कंपनी यह कदम सोच-समझकर उठा रही है।
छंटनी की सबसे बड़ी वजह एआई!
रिपोर्ट्स के मुताबिक कॉग्निजेंट अब पारंपरिक पिरामिड मॉडल से हटकर एआई आधारित और लीन ऑपरेटिंग मॉडल अपनाना चाहती है। कंपनी का फोकस अब कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करने पर है। ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से कार्यक्षमता बढ़ाने की योजना है। इससे लागत में कमी आएगी और मुनाफे में सुधार होगा।
आईटी सेक्टर में नई चुनौती
आईटी सेक्टर में घटती मांग और बदलती तकनीक के कारण कंपनियां अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं। ऐसे में छंटनी एक आम प्रक्रिया बनती जा रही है। कॉग्निजेंट का यह कदम अन्य कंपनियों के लिए भी संकेत हो सकता है। आने वाले समय में और कंपनियां भी इसी राह पर चल सकती हैं।












