छत्तीसगढ़ शराब घोटाला :ED ने निरंजन दास समेत 30 अधिकारियों की 38.21 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास और 30 अन्य अधिकारियों की 38.21 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां कुर्क कीं। शराब घोटाले से राज्य को लगभग 2,800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जांच जारी, आगे और बड़ी कार्रवाई की संभावना।
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ED ने निरंजन दास समेत 30 अधिकारियों की 38.21 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में तत्कालीन आबकारी आयुक्त आईएएस निरंजन दास और 30 अन्य आबकारी अधिकारियों की 38.21 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत की गई। ED के मुताबिक, इस घोटाले से राज्य के आबकारी खजाने को लगभग 2,800 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ।

    जांच एजेंसी ने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों में आलीशान बंगले, प्रीमियम कॉलोनियों में फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें, कृषि भूमि और बैंक फंड, जीवन बीमा पॉलिसी, शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश शामिल हैं। ED के अधिकारियों का दावा है कि आगे की जांच में और संपत्तियों की कुर्की हो सकती है।

    कुर्क की गई संपत्तियों का विवरण

    ED की जांच में कुल 275 चल और अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं।

    प्रकार

    संख्या

    विवरण

    मूल्य (रुपए)

    अचल संपत्ति

    78

    आलीशान बंगले, फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें, कृषि भूमि

    21,64,65,015

    चल संपत्ति

    197

    बैंक खातों में जमा राशि, FD, जीवन बीमा, शेयर और म्यूचुअल फंड

    16,56,54,717

    कुल

    275

    -

    38,21,19,732

    शराब घोटाले का तरीका और सिंडिकेट

    • जांच में सामने आया कि वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारियों का एक आपराधिक सिंडिकेट आबकारी विभाग पर पूरी तरह नियंत्रण रखता था।
    • निरंजन दास और अरविंद कुमार त्रिपाठी (CSMCL के तत्कालीन CEO) ने अवैध Part-B शराब योजना चलाई।
    • नकली होलोग्राम और गैरकानूनी बोतलों के जरिए शराब सीधे दुकानों तक पहुंचाई गई।
    • सरकारी नियंत्रण को दरकिनार करते हुए अवैध वसूली की गई और अधिकारियों की मिलीभगत से यह संभव हुआ।

    ED की जांच में यह भी पाया गया कि आबकारी अधिकारियों को Part-B शराब बिक्री की अनुमति देने के लिए प्रति मामले 140 रुपए का कमीशन और प्रति माह 50 लाख रुपए की रिश्वत दी जाती थी। अकेले निरंजन दास ने 18 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। कुल मिलाकर 31 अधिकारियों ने 89.56 करोड़ रुपए की पीओसी (Profit on Corruption) अर्जित की।

    शराब घोटाले से हुए नुकसान का आकलन

    जांच के अनुसार, यह घोटाला मुख्य रूप से नकली होलोग्राम और अवैध शराब निर्माण के माध्यम से किया गया। ED ने यह भी कहा कि राज्य के आबकारी खजाने को 2,800 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। जांच जारी है और आगामी रिपोर्ट के आधार पर नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    घोटाले में शामिल जिलों की सूची

    नकली होलोग्राम शराब की खपत मुख्य रूप से निम्नलिखित जिलों में हुई:

    रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, कबीरधाम, बालोद, महासमुंद, धमतरी, बलौदाबाजार, गरियाबंद, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, कोरबा, बेमेतरा, रायगढ़

    निलंबित आबकारी अधिकारियों का विवरण

    ED ने कई निलंबित अधिकारियों की सूची जारी की है। इनमें उपायुक्त, सहायक आयुक्त, जिला आबकारी अधिकारी और राज्य स्तरीय उड़नदस्ता शामिल हैं।

    अधिकारी

    पद

    वर्तमान पदस्थापना

    अनिमेष नेताम

    उपायुक्त आबकारी

    संभागीय उड़नदस्ता रायपुर-दुर्ग

    अरविंद कुमार पाटले

    आबकारी आयुक्त

    नवा रायपुर

    नीतू नातानी

    आबकारी आयुक्त

    नवा रायपुर

    विजय सेन शर्मा

    उपायुक्त

    संभागीय उड़नदस्ता, सरगुजा

    मोहित कुमार जायसवाल

    आबकारी आयुक्त

    नवा रायपुर

    ...

    ...

    ...

    भ्रष्टाचार और कानूनी कार्रवाई

    • रायपुर स्थित ACB/EOW ने IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत FIR दर्ज की।
    • ED ने PMLA के तहत चल और अचल संपत्तियां कुर्क कर राज्य के राजस्व की रक्षा की।
    • कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया कि सरकारी संपत्ति में अवैध हेरफेर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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