Cg news: छत्तीसगढ़ विधानसभा में अफीम की खेती और धान खरीदी पर जोरदार हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में अफीम की खेती और धान खरीदी जैसे मुद्दों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। विपक्ष ने जहां सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं सरकार ने अपने जवाब में आरोपों को खारिज करते हुए आंकड़ों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में अफीम की खेती और धान खरीदी पर जोरदार हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट
PHOTO SOURCE-CG VIDHANSABHA
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार 9 मार्च 2026 को कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दुर्ग में भाजपा नेता की जमीन पर कथित अफीम की खेती के आरोपों और बस्तर क्षेत्र में धान खरीदी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए गंभीर सवाल उठाए।

    अफीम खेती के मुद्दे पर सरकार पर निशाना

    रायपुर। सदन में शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने दुर्ग में भाजपा नेता विनय ताम्रकार की बहनों की जमीन पर कथित अफीम की खेती का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि- राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ बनाने की जगह 2047 तक ‘अफीम का कटोरा’ बनाने की दिशा में बढ़ रही है। महंत ने कहा कि- इस मामले में प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध दिखाई देती है, और इसकी जांच स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से कराई जानी चाहिए।

    पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि-कलेक्टर ने विनय ताम्रकार को मुख्य आरोपी बताया है, लेकिन दर्ज एफआईआर में उनके नौकर को मुख्य आरोपी बनाया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि-FIR में जमीन के रकबे और मालिक का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया, जिससे मामले को कमजोर करने की कोशिश की आशंका पैदा होती है।

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    धान खरीदी को लेकर किसानों का मुद्दा भी गरमाया

    विधानसभा में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने बस्तर क्षेत्र में धान खरीदी नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि-32 हजार से अधिक आदिवासी किसानों का धान पंजीयन और टोकन होने के बावजूद नहीं खरीदा गया, जिससे करीब 206 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। लखमा ने सवाल उठाया कि- जिन किसानों का धान नहीं खरीदा गया, वे अपने कर्ज की भरपाई कैसे करेंगे। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की। इस पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने जवाब देते हुए कहा कि-केवल उन्हीं किसानों का धान खरीदा गया जो खरीदी केंद्रों तक धान लेकर पहुंचे थे। उनके मुताबिक करीब 44 हजार किसान धान बेचने के लिए केंद्रों तक पहुंचे ही नहीं।

    सदन में तीखी बहस, विपक्ष ने किया वॉकआउट

    सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने धान खरीदी में अनियमितताओं और किसानों पर जबरिया समर्पण का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं ने सरकार से यह भी मांग की कि धान समर्पण करने वाले किसानों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक की जाए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार से धान खरीदी का पूरा आंकड़ा पेश करने की मांग की और कहा कि किसानों के साथ धोखाधड़ी हुई है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद विपक्षी विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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