इंदौर में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के दौरान हुई दर्दनाक घटना ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी है। इस हादसे में 8 की मौत हो गई, जिसके बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या इलेक्ट्रिक वाहन (EV) वास्तव में सुरक्षित हैं या इनके साथ जोखिम भी बढ़ रहे हैं।
तेजी से बढ़ते ईवी उपयोग के बीच यह घटना एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आई है, जिसने आम लोगों के मन में डर और असमंजस दोनों पैदा कर दिए हैं।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में 2023 से 2025 के बीच करीब 23,हजार से ज्यादा ईवी से जुड़े हादसे दर्ज किए गए हैं।
हालांकि, इन सभी घटनाओं में से केवल 26 मामलों में आग लगने की पुष्टि हुई है। इसका मतलब यह है कि आग की घटनाएं कुल हादसों के मुकाबले कम हैं, लेकिन जब भी होती हैं, तो बेहद गंभीर और जानलेवा साबित होती हैं।
जांच एजेंसियों और विशेषज्ञों के अनुसार, ईवी से जुड़े ज्यादातर हादसों की जड़ बैटरी में छिपी तकनीकी खामियां होती हैं। जिनमें मुख्य कारण ये है।
इन खामियों के चलते बैटरी अचानक गर्म होकर आग पकड़ सकती है या विस्फोट का कारण बन सकती है।
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इंदौर के अलावा भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिन्होंने लोगों की चिंता बढ़ाई है।
इन घटनाओं से साफ है कि समस्या अलग-अलग जगहों पर सामने आ रही है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इन बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए AIS-156 नामक सख्त सुरक्षा मानक लागू किए हैं।
इसके तहत:
इन नियमों का उद्देश्य ईवी को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही तरीके से ईवी का इस्तेमाल किया जाए, तो जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ध्यान रखने वाली जरूरी बातें:
कुल मिलाकर इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह असुरक्षित नहीं हैं, लेकिन इनके साथ सावधानी बेहद जरूरी है। इंदौर जैसी घटनाएं यह जरूर बताती हैं कि नई तकनीक के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अगर सही तकनीक और सही उपयोग को अपनाया जाए, तो इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य का एक सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प साबित हो सकते हैं।