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EV कितनी सुरक्षित?चार्जिंग के दौरान मौत का खतरा! इंदौर हादसे ने खोली EV सुरक्षा की हकीकत, बढ़ाई चिंता

एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या इलेक्ट्रिक वाहन (EV) वास्तव में सुरक्षित हैं या इनके साथ जोखिम भी बढ़ रहे हैं।
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चार्जिंग के दौरान मौत का खतरा! इंदौर हादसे ने खोली EV सुरक्षा की हकीकत, बढ़ाई चिंता
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के दौरान हुई दर्दनाक घटना ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी है। इस हादसे में  8 की मौत हो गई, जिसके बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या इलेक्ट्रिक वाहन (EV) वास्तव में सुरक्षित हैं या इनके साथ जोखिम भी बढ़ रहे हैं।

    तेजी से बढ़ते ईवी उपयोग के बीच यह घटना एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आई है, जिसने आम लोगों के मन में डर और असमंजस दोनों पैदा कर दिए हैं।

    EV से हुए हादसों के आंकड़ें

    अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में 2023 से 2025 के बीच करीब 23,हजार से ज्यादा ईवी से जुड़े हादसे दर्ज किए गए हैं। 

    • 2023 में  5,594 मामले
    • 2024 में  7,817 मामले
    • 2025 में  10,454 मामले

    हालांकि, इन सभी घटनाओं में से केवल 26 मामलों में आग लगने की पुष्टि हुई है। इसका मतलब यह है कि आग की घटनाएं कुल हादसों के मुकाबले कम हैं, लेकिन जब भी होती हैं, तो बेहद गंभीर और जानलेवा साबित होती हैं।

    हादसों के पीछे की असली वजह

    जांच एजेंसियों और विशेषज्ञों के अनुसार, ईवी से जुड़े ज्यादातर हादसों की जड़ बैटरी में छिपी तकनीकी खामियां होती हैं। जिनमें मुख्य कारण ये है।

    • बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) की खराबी
    • चार्जिंग के दौरान ओवरहीटिंग
    • शॉर्ट सर्किट
    • बैटरी सेल में तकनीकी खामी

    इन खामियों के चलते बैटरी अचानक गर्म होकर आग पकड़ सकती है या विस्फोट का कारण बन सकती है।

    देश के अन्य मामलों ने भी बढ़ाई चिंता

    इंदौर के अलावा भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिन्होंने लोगों की चिंता बढ़ाई है।

    • हापुड़ में चलती ईवी कार में आग लगने का मामला
    • रतलाम में ई-बाइक की बैटरी फटने की घटना

    इन घटनाओं से साफ है कि समस्या अलग-अलग जगहों पर सामने आ रही है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    सरकार ने सख्त किए नियम

    इन बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए AIS-156 नामक सख्त सुरक्षा मानक लागू किए हैं।

    इसके तहत:

    • बैटरी को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि एक सेल खराब होने पर आग पूरे सिस्टम में न फैले
    • स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य किया गया है
    • ओवरहीटिंग अलर्ट और वॉटरप्रूफिंग जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं

    इन नियमों का उद्देश्य ईवी को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाना है।

    ऐसे कम हो सकता है खतरा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही तरीके से ईवी का इस्तेमाल किया जाए, तो जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    ध्यान रखने वाली जरूरी बातें:

    • हमेशा कंपनी द्वारा प्रमाणित चार्जर का ही उपयोग करें
    • एक्सटेंशन बोर्ड से चार्जिंग करने से बचें
    • वाहन को खुले और हवादार स्थान पर चार्ज करें
    • बैटरी या चार्जिंग में किसी भी असामान्यता को नजरअंदाज न करें

    डर नहीं, समझदारी जरूरी

    कुल मिलाकर इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह असुरक्षित नहीं हैं, लेकिन इनके साथ सावधानी बेहद जरूरी है। इंदौर जैसी घटनाएं यह जरूर बताती हैं कि नई तकनीक के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अगर सही तकनीक और सही उपयोग को अपनाया जाए, तो इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य का एक सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प साबित हो सकते हैं।

    Jitendra Sharma
    By Jitendra Sharma
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