कभी पुलिस के लिए सिरदर्द:अब जेल के भीतर मौत... क्या है जगन गुर्जर की पूरी कहानी?

बुधवार को जगन गुर्जर का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच किया गया। परिजनों ने परिवार की सुरक्षा, जेल प्रशासन की जांच और अन्य मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा। जगन गुर्जर का नाम दशकों तक राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चंबल बीहड़ों में खौफ का पर्याय माना जाता रहा। जेल के भीतर हुई इस हत्या ने एक बार फिर उसके आपराधिक इतिहास और सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।
धरने के बाद बनी सहमति
मंगलवार देर शाम पुलिस और परिजनों के बीच बातचीत के बाद कुछ मांगों पर सहमति बनी। परिजनों का कहना है कि जगन गुर्जर के बेटे आसाराम को सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराया जाएगा और अजमेर जेल में बंद उनके छोटे भाई को दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके साथ ही जेल अधिकारियों और जेल प्रशासन की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा भी दिया गया। हालांकि इन सहमतियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ अंतिम संस्कार
बुधवार को धौलपुर जिले के पैतृक गांव में जगन गुर्जर का अंतिम संस्कार किया गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए कई पुलिस थानों का पुलिस बल गांव में तैनात किया गया था। पुलिस के मुताबिक परिजनों की मांग पर उनके भाई पप्पू गुर्जर, लाल सिंह और पान सिंह को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी गई।
बीहड़ों में दशकों तक भय का पर्याय रहा जगन गुर्जर का नाम
धौलपुर जिले के बाड़ी थाना क्षेत्र के भवूतिपुरा गांव में एक सामान्य किसान परिवार में जन्मे जगन गुर्जर का बचपन साधारण रहा। समय के साथ वह राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के चंबल बीहड़ों का चर्चित डकैत बन गया। पुलिस अधिकारियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि वह चंबल क्षेत्र के आखिरी बड़े सक्रिय डकैतों में गिना जाता था। वर्षों तक उसका नाम बीहड़ों में दहशत का पर्याय बना रहा।
राजनीति में आने की इच्छा, लेकिन नहीं मिला मौका
जगन गुर्जर की तीन पत्नियां थीं। उन्होंने अपनी पहली पत्नी को बाड़ी विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव भी लड़वाया था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। खुद जगन भी राजनीति में आने का इच्छुक था, मगर आपराधिक छवि और लंबित मामलों के कारण उसका यह सपना पूरा नहीं हो सका। उसकी पत्नी कोमलेश भी दस्यु गतिविधियों के कारण कई बार सुर्खियों में रही हैं। उसके चार भाइयों में से एक अजमेर और दो अन्य भरतपुर जेल में बंद हैं।
2008 में धौलपुर स्थित महल को उड़ाने की धमकी दी
साल 2008 के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को उड़ाने की कथित धमकी देने के बाद जगन गुर्जर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। वर्ष 2019 में बाड़ी कस्बे में दुकानदार से विवाद के बाद मुख्य बाजार बंद कराने और फायरिंग की घटना ने भी उसे सुर्खियों में ला दिया।












