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हमारी बचत पर ‘बजट’ भारी

मिडिल क्लास की थाली बजट के बाहर, पिछले साल से 6.70 रुपए महंगी हुई
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हमारी बचत पर ‘बजट’ भारी

अखिल सोनी-इंदौर। महंगाई से अगर किसी की सबसे ज्यादा कमर टूटती है तो वह है मिडिल क्लास। मिडिल क्लास के खर्च कंट्रोल में होते हैं। यह व्यर्थ ही पैसा खर्च नहीं करते और सेविंग्स पर फोकस करते हैं...लेकिन इन दिनों मिडिल क्लास की सेविंग्स पर महंगाई का बोझ बढ़ गया है। यह बोझ घर के किचन से बढ़ रहा है।

दरअसल दाल, आलू, टमाटर और प्याज के बढ़ते दामों ने बजट बढ़ा दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो एक मिडिल क्लास थाली का बजट पिछले साल की तुलना 27.40 फीसदी बढ़ गया है। यानी एक शाकाहारी सादी थाली की कीमत 6.70 रुपए बढ़ गई है। जुलाई 2023 में इसी थाली की कीमत 24.45 रुपए थी, जो अब बढ़कर 31.15 रुपए हो गई है।

दाल, प्याज, टमाटर और आलू की कीमतों का असर

आलू-प्याज मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम प्रकाश गर्ग ने बताया कि जनवरी की तुलना में प्याज दो गुना, टमाटर 10 गुना, आलू दो गुना बढ़ गए हैं। प्याज और टमाटर की फसल अच्छी नहीं होने से ये तेजी आई है। इधर दाल में करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि आई है।

ऐसे समझें मिडिल क्लास फैमिली की थाली की कीमत...

अब हम आपकों समझाते हैं कि कैसे थाली की कीमत मिडिल क्लास के बजट को बिगाड़ रही है। एक मिडिल क्लास फैमली में चार सदस्य (पति, पत्नी और दो बच्चे) हैं। वर्तमान में प्रति थाली की कीमत 31.15 रुपए है। एक दिन (दोनों वक्त का खाना चार लोगों का) के खाने की कीमत देखें तो 249.2 रुपए, एक महीने का 7476 रुपए और एक साल का 89,712 रुपए होता है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसी खाने की थाली की कीमत 24.45 रुपए थी, इस हिसाब से एक दिन का 195.60 रुपए, एक महीने 5,868 रुपए और एक साल 70,416 रुपए खर्च हो रहा था। यानी इस साल 19,296 रुपए अधिक खर्च हो रहे हैं।

2021 में 43 लाख मीट्रिक टन की तुलना में इस साल दाल का उत्पादन 24 लाख मीट्रिक टन ही है। इसका असर कीमतों पर पड़ा। केंद्र ने बड़ी कंपनियों को दाल आयात की अनुमति दे रखी है, जो सिर्फ मुनाफे कमाती हैं। सरकार को छोटी कंपनियों को आयात की अनुमति देनी होगी। -सुरेश अग्रवाल,अध्यक्ष, ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन

किचन से ही घर का बजट तय होता है। खाने की चीजों के दाम कम रहेंगे तो खर्च कम होगा और बचत ज्यादा होगी। अभी सब्जी और दाल की कीमतें ज्यादा बढ़ गई हैं। हमने टमाटर लेना ही छोड़ दिया है। 50 रु. किलो से अधिक की सब्जी खाना हमारे बस की बात नहीं है। इन कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। -शालिनी वर्मा, गृहिणी

सरकार ने खाद्य कीमतों को कम रखने के लिए एक योजना बनाई है, लेकिन वह असफल साबित हो रही है। प्याज का निर्यात करना सरकार की सबसे बड़ी गलती है। हमारे यहां मौसम इतना भरोसे लायक नहीं है कि हर बार उत्पादन बेहतर हो। सरकार को खाद्य महंगाई दर को कंट्रोल में रखने पर काम करने की आवश्यकता है। -जयंती लाल भंडारी, अर्थशास्त्री

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