महंगाई की मार से परेशान ऑटो चालक:फटे अंडरवियर दिखाकर किया प्रदर्शन, बोले- गैस भराएं या घर चलाएं

पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच अब भोपाल में ऑटो चालकों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। सोमवार सुबह रायसेन रोड स्थित छावनी पठार इलाके में बड़ी संख्या में ऑटो चालक इकट्ठा हुए और अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। चालकों ने हाथों में फटे अंडरवियर लेकर अपनी आर्थिक बदहाली का प्रतीकात्मक विरोध जताया और सरकार से ऑटो किराया बढ़ाने की मांग की। रायसेन रोड स्थित शनि मंदिर के पास हुए इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में ऑटो चालकों ने कहा कि बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों ने उनकी कमर तोड़ दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
500 की गैस, 1200 की कमाई
ऑटो संगठन के अध्यक्ष संजू अहिरवार ने बताया कि एक सीएनजी ऑटो में रोज करीब 500 रुपए की गैस भरवानी पड़ती है। पूरे दिन मेहनत करने के बाद करीब 1200 रुपए की कमाई होती है। इसमें से गैस का खर्च निकालने के बाद सिर्फ 700 रुपए बचते हैं जिनसे ऑटो की किश्त, मरम्मत, घर खर्च और बच्चों की जिम्मेदारियां पूरी करनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि दिनभर की मेहनत के बाद मुश्किल से 400-500 रुपए ही बच पाते हैं। ऐसे में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। इसलिए सरकार को तुरंत ऑटो किराए में बढ़ोतरी करनी चाहिए।
फटे अंडरवियर दिखाकर बयां की मजबूरी
प्रदर्शन के दौरान ऑटो चालकों ने फटे अंडरवियर दिखाकर अपनी आर्थिक स्थिति को जाहिर किया। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई में वाहन की किश्त, ईंधन खर्च और परिवार की जिम्मेदारियां निभाते-निभाते हालत खराब हो चुकी है।
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लंबे समय से नहीं बढ़ा किराया
ऑटो संगठन का कहना है कि पिछले लंबे समय से ऑटो किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है जबकि सीएनजी और पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इससे हजारों ऑटो चालकों की आय पर सीधा असर पड़ा है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि मौजूदा हालात को देखते हुए किराया पुनर्निर्धारित किया जाए ताकि चालक समय पर किश्त जमा कर सकें और परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर सकें।
मेहनतकश वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
ऑटो चालक पुषेंद्र अहिरवार विशाल और राजेश ने कहा कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर मेहनतकश लोगों पर पड़ रहा है। रोजाना की कमाई का बड़ा हिस्सा ईंधन में खर्च हो जाता है। ऐसे में बचत करना तो दूर, घर की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।












