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'ब्रिज मैन ऑफ इंडिया':गिरीश भारद्वाज का निधन, 140 से ज्यादा पुल बनाकर बदली हजारों गांवों की तस्वीर

पद्मश्री से सम्मानित इंजीनियर गिरीश भारद्वाज अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने कम लागत वाले सस्पेंशन पुल बनाकर दूर-दराज के गांवों को शहरों से जोड़ा और लाखों लोगों की जिंदगी आसान बनाई। उनके निधन पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने गहरा दुख जताते हुए उनके योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही।
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गिरीश भारद्वाज का निधन, 140 से ज्यादा पुल बनाकर बदली हजारों गांवों की तस्वीर
140 पुल बनाकर अमर हुए गिरीश भारद्वाज।

बेंगलुरु। ग्रामीण भारत को नई पहचान देने वाले प्रसिद्ध इंजीनियर और पद्मश्री सम्मानित गिरीश भारद्वाज का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। कम खर्च में मजबूत सस्पेंशन पुल बनाने की उनकी तकनीक ने देश के कई राज्यों के दूरस्थ गांवों तक लोगों की पहुंच आसान बनाई। उनके निधन के बाद सामाजिक सेवा और ग्रामीण विकास से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। राज्य सरकार के कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

गांवों को जोड़ने का सपना किया साकार

गिरीश भारद्वाज को पूरे देश में 'ब्रिज मैन ऑफ इंडिया' के नाम से जाना जाता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन उन गांवों के लिए समर्पित कर दिया, जहां नदी या पहाड़ी रास्तों के कारण लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कम लागत वाले सस्पेंशन पुल तैयार किए, जिससे बच्चों के लिए स्कूल जाना, मरीजों का अस्पताल पहुंचना और ग्रामीणों का बाजार तक आना जाना आसान हो गया। उनके बनाए पुल आज भी हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा बने हुए हैं।

पहले पुल से मिली नई पहचान

गिरीश भारद्वाज ने वर्ष 1989 में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के अरंबूर गांव में पायस्विनी नदी पर अपना पहला सस्पेंशन पुल बनाया था। इस पुल की सफलता के बाद उन्होंने इसी मॉडल पर देश के कई राज्यों में पुल तैयार किए। कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में उनके बनाए 140 से अधिक पुल आज भी लोगों की सुविधा का बड़ा साधन हैं। उनकी तकनीक कम खर्च वाली होने के साथ मजबूत और टिकाऊ भी मानी जाती थी।

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इंजीनियरिंग को बनाया समाज सेवा का माध्यम

मंड्या के P.E.S College of Engineering से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद गिरीश भारद्वाज निजी क्षेत्र में काम करना चाहते थे लेकिन उनके पिता ने उन्हें गांवों की समस्याओं के समाधान के लिए काम करने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी शुरू की और ग्रामीण इलाकों के लिए सस्ते और सुरक्षित पुल बनाने का अभियान शुरू किया। उन्होंने तकनीक का इस्तेमाल केवल व्यवसाय के लिए नहीं बल्कि समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया।

देश ने पद्मश्री देकर किया सम्मानित

ग्रामीण विकास और समाज सेवा में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2017 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके वर्षों की मेहनत और समाज के प्रति समर्पण का प्रमाण माना गया। गिरीश भारद्वाज हमेशा सादगी भरा जीवन जीते रहे और लोगों की मदद को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते थे।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य ने तकनीकी क्षेत्र का एक असाधारण व्यक्तित्व खो दिया है। उन्होंने कहा कि गिरीश भारद्वाज ने 140 से अधिक सस्पेंशन पुल बनाकर ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी और लाखों लोगों का जीवन आसान बनाया। वहीं उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने भी उन्हें विज्ञान, तकनीक और समाज सेवा के क्षेत्र की अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि गिरीश भारद्वाज का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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हमेशा याद किए जाएंगे गिरीश भारद्वाज

गिरीश भारद्वाज केवल पुल बनाने वाले इंजीनियर नहीं थे बल्कि वे लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले समाजसेवी भी थे। उन्होंने यह साबित किया कि सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। उनके बनाए पुल केवल दो किनारों को नहीं जोड़ते थे बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास के नए रास्ते भी खोलते थे। उनके निधन से देश ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया है, जिसने अपने ज्ञान और मेहनत से लाखों लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया। उनका काम आने वाले वर्षों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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