मानव इतिहास एक बार फिर अंतरिक्ष में नई छलांग लगाने जा रहा है। NASA ने अपने बहुप्रतीक्षित Artemis II मिशन के लॉन्च की तारीख तय कर दी है। 1 अप्रैल 2026 को यह मिशन उड़ान भरेगा और इसके साथ ही 54 साल बाद इंसान एक बार फिर चांद के बेहद करीब पहुंचेगा। 1972 में Apollo 17 के बाद यह पहला मौका होगा जब इंसान पृथ्वी से इतनी दूर और चंद्रमा के इतने पास जाएगा। यह मिशन केवल एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों की नींव माना जा रहा है। दुनियाभर के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों की नजर इस मिशन पर टिकी है, क्योंकि इसकी सफलता मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के अगले युग की शुरुआत कर सकती है।
Artemis II नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम का पहला मानवयुक्त मिशन है। इसमें चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर यात्रा करेंगे और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आएंगे। यह मिशन करीब 10 दिनों का होगा। इसमें अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसके चारों ओर चक्कर लगाते हुए उसकी नजदीकी से अध्ययन करेंगे। इस मिशन की खास बात यह है कि यह भविष्य के बड़े मिशनों के लिए एक टेस्ट फ्लाइट की तरह काम करेगा। इसमें इस्तेमाल होने वाली तकनीकों और सिस्टम की गहन जांच की जाएगी।
1972 में Apollo 17 के साथ अपोलो कार्यक्रम खत्म हुआ था। उस मिशन के बाद इंसान चंद्रमा के पास नहीं गया। अपोलो मिशनों ने चंद्रमा की संरचना, सतह और उसके निर्माण से जुड़े कई रहस्यों को उजागर किया था। लेकिन अब वैज्ञानिकों का लक्ष्य केवल जानकारी जुटाना नहीं, बल्कि वहां स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए नासा ने आर्टेमिस प्रोग्राम शुरू किया, जिसका दूसरा चरण यानी Artemis II अब उड़ान भरने के लिए तैयार है।
ये भी पढ़ें: IPL प्रेमियों के लिए खास सुविधा! रात 12:30 बजे तक चलेगी लखनऊ मेट्रो
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनेंगे:
ये सभी अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं और मिशन से पहले अंतिम तैयारियों के लिए फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर पहुंच चुके हैं।
Artemis II को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए नासा का सबसे शक्तिशाली रॉकेट Space Launch System (SLS) इस्तेमाल किया जाएगा। यह रॉकेट अंतरिक्ष यात्रियों को Orion spacecraft में बैठाकर चंद्रमा की ओर भेजेगा। ओरियन कैप्सूल को खास तौर पर गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन तकनीक, कम्युनिकेशन सिस्टम और हीट शील्ड लगी है, जो इसे सुरक्षित बनाती है।
इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से निकलकर चंद्रमा के पास पहुंचेंगे और उसकी परिक्रमा करेंगे। यह यात्रा तेज गति से होगी और इसमें अंतरिक्ष यात्री कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी परीक्षण करेंगे। मिशन के दौरान ओरियन कैप्सूल के हर सिस्टम की जांच की जाएगी, ताकि भविष्य के मिशनों में किसी भी जोखिम को कम किया जा सके।
NASA का लक्ष्य केवल चंद्रमा तक पहुंचना नहीं है। आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत नासा चांद पर स्थायी मानव बेस स्थापित करने की योजना बना रहा है। इसके बाद मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने की तैयारी की जाएगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, जहां से आगे की यात्राएं आसान होंगी।