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CG NEWS:बिलासपुर के लॉ कॉलेजों में पढ़ाई का पैटर्न बदलेगा, नए सत्र से फॉरेंसिक साइंस होगी अनिवार्य

यूजीसी के निर्देश पर कानून की पढ़ाई में डिजिटल फॉरेंसिक, डीएनए जांच और साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन को मिलेगा स्थान, छात्रों को आधुनिक न्याय व्यवस्था के अनुरूप किया जाएगा तैयार नए सत्र से लॉ कॉलेजों में फॉरेंसिक साइंस को विशेष महत्व दिया जाएगा। छात्रों को डीएनए परीक्षण, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्य संग्रहण, साइबर अपराध जांच और अपराध स्थल प्रबंधन जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी।
बिलासपुर के लॉ कॉलेजों में पढ़ाई का पैटर्न बदलेगा, नए सत्र से फॉरेंसिक साइंस होगी अनिवार्य

RAIPUR  NEWS बिलासपुर के 10 से अधिक विधि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र से कानून की पढ़ाई का स्वरूप बदलने जा रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप फॉरेंसिक आधारित अध्ययन को पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत छात्रों को वैज्ञानिक साक्ष्यों, डिजिटल फॉरेंसिक और अपराध जांच की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा।

यूजीसी के निर्देशों के बाद बदलेगा पाठ्यक्रम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों और लॉ कॉलेजों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि भारतीय न्याय संहिता के तहत न्यायिक प्रक्रिया में फॉरेंसिक विज्ञान की बढ़ती भूमिका को देखते हुए पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव किए जाएं। इसके तहत विधि छात्रों को अब केवल कानूनी धाराओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि अपराध जांच से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं का भी अध्ययन कराया जाएगा।

फॉरेंसिक साइंस होगी अध्ययन का अहम हिस्सा

नए सत्र से लॉ कॉलेजों में फॉरेंसिक साइंस को विशेष महत्व दिया जाएगा। छात्रों को डीएनए परीक्षण, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्य संग्रहण, साइबर अपराध जांच और अपराध स्थल प्रबंधन जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी। इससे वे अदालतों में प्रस्तुत होने वाले वैज्ञानिक साक्ष्यों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

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बिलासपुर के संस्थानों पर होगा असर

बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के विधि विभाग, कौशलेंद्र राव विधि महाविद्यालय सहित कई निजी और शासकीय संस्थानों में हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई करते हैं। पाठ्यक्रम में बदलाव का सीधा लाभ इन विद्यार्थियों को मिलेगा, जो भविष्य में वकालत, न्यायिक सेवा और अभियोजन जैसे क्षेत्रों में करियर बनाना चाहते हैं।

आधुनिक न्याय व्यवस्था की जरूरतों पर फोकस

देश में लागू नए आपराधिक कानूनों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। कई गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य महत्व दिया गया है। ऐसे में वकीलों, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों के लिए वैज्ञानिक जांच प्रक्रियाओं की समझ आवश्यक हो गई है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है।

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छात्रों को मिलेगा व्यावहारिक लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि फॉरेंसिक आधारित शिक्षा से कानून के छात्रों की पेशेवर दक्षता बढ़ेगी। इससे वे अदालतों में प्रस्तुत वैज्ञानिक साक्ष्यों की प्रमाणिकता, जांच प्रक्रिया और तकनीकी पहलुओं को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। साथ ही साइबर अपराध और डिजिटल अपराधों से जुड़े मामलों में भी उनकी समझ मजबूत होगी।

PREM

मै प्रेम निर्मलकर मैने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से की, विगत 18 वर्षों से मुझे पत...Read More

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