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नई दिल्ली/ पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है। पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों और दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर मतदान हुआ। यानी राज्य की 243 सीटों पर जनता ने अपना फैसला ईवीएम में बंद कर दिया है। अब सबकी निगाहें 14 नवंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। वहीं बिहार चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजों का रुझान आने शुरू हो गए हैं।
| एजेंसी | एनडीए | महागठबंधन | जन सुराज | अन्य |
|---|---|---|---|---|
| मैट्रीज IANS | 147–167 | 70–90 | 0–2 | 2–8 |
| पीपल्स इनसाइट | 133–148 | 87–102 | 0–2 | 3–6 |
| पीपल्स पल्स | 133–159 | 75–101 | 0–5 | 2–8 |
| जेवीसी पोल | 135–150 | 88–103 | 0–1 | 3–6 |
| कामाख्या | 167–187 | 54–74 | 0–2 | 2–7 |
| चाणक्य स्ट्रैटजीज | 130–138 | 100–108 | 0–0 | 3–5 |
| पोल स्टार्ट | 133–148 | 87–102 | 0–0 | 3–5 |
| प्रजा पोल एनालिटिक्स | 186 | 50 | 7 | — |
| TIF रिसर्च | 145–163 | 76–95 | 0–1 | — |
| पी मार्क | 142-162 | 80-98 | 1-7 | |
| डीवी रिसर्च | 137-152 | 83-98 | 3-12 |
बिहार विधानसभा में अभी BJP के पास 80 विधायक, RJD के 77, JDU के 45, और कांग्रेस के 19 विधायक हैं। इसके अलावा CPI (ML) के 11, हम के 4, CPI (M) के 2, CPI के 2, AIMIM के 1, और 2 निर्दलीय विधायक मौजूद हैं।
पिछले विधानसभा चुनावा यानि 2020 में NDA को 125 सीटें मिली थीं। महागठबंधन के 110 विधायक चुनकर आए थे। वहीं, अन्य पार्टियों को 8 सीटें मिली थीं। पार्टीवार देखें तो RJD को 75, BJP को 74, JDU को 43 और कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं।
P-MARQ के एग्जिट पोल में भी एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। इस पोल के अनुसार, एनडीए को 142-162 सीटें, महागठबंधन को 80-98 सीटें तथा जन सुराज को 1-4 और अन्य के खाते में 0-3 सीटें जाने का अनुमान है।
तमाम एग्जिट पोल में प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी जन सुराज को बड़ा कमाल करते नहीं दिख रही है। पोल्स के मुताबिक जन सुराज की इतनी सीटें भी नहीं आ रही हैं कि वह सरकार बनाने में अपनी निर्णायक भूमिका निभा सके। सिर्फ प्रजा पोल एनालिटिक्स ने जन सुराज को 7 सीटें दी है। ज्यादातर पोल्स ने उसे 0-2 सीटें दी हैं।
पोल्स ऑफ पोल्स के एग्जिट पोल में दावा किया गया है कि एनडीए की 138 से 155 के बीच में सीटें आ सकती हैं। वहीं महागठबंधन को 82-98, जनसुराज को 0-2 था अन्य के खाते में 3-7 सीटें मिलने का अनुमान है। अन्य के खाते में 3 से 7 सीटें जा सकती है।
बिहार में POLL DIARY के एग्जिट पोल में NDA को 184-209 सीट और महागठबंधन को 32-49 व अन्य को 1-5 सीट मिलने का अनुमान हैद्ध
बिहार चुनाव को लेकर चाणक्य STRATEGIES एग्जिट पोल भी सामने आ आया है। CHANAKAYA STRATEGIES के अनुसार एनडीए को 130-138 सीट, महागठबंधन को 100-108 और अन्य को 3-5 सीट मिलती दिख रही है।
पीपल्स इंसाइट के एग्जिट पोल में भी एनडीए को 133-148 सीटें मिलने का अनुमान है, वहीं महागठबंधन के खाते में 87-102 सीटें जाती हुई दिख रही हैं। जनसुराज को 0-2 सीटें तथा अन्य को 3-6 सीटें मिलने का अनुमान है।
जेवीसी एग्जिट पोल में भी एनडीए को बंपर बहुमत मिलता दिख रहा है, जिसमें एनडीए को 135-150 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन को 88-103 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं अन्य के खाते में 3-6 सीटें जाने का अनुमान है।
वोटिंग खत्म होते ही प्रमुख एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल्स जारी करने शुरू कर दिए हैं।
MATRIZE-आईएएनएस के एग्जिट पोल के मुताबिक
अगर यह रुझान नतीजों में बदलता है तो नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA की सरकार एक बार फिर सत्ता में वापसी कर सकती है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि “बदलाव की लहर” को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता और अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस बार के चुनाव में मतदाताओं ने उम्मीद से ज्यादा बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चुनाव आयोग के मुताबिक, औसतन मतदान प्रतिशत पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में अधिक रहा है। चुनावी माहौल में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। राज्य की जनता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनादेश किसी एक खेमे के पक्ष में निर्णायक रूप से जा सकता है। अब सभी राजनीतिक दल परिणामों को लेकर रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
बिहार में इस बार दो चरणों में मतदान संपन्न हुआ
राज्यभर में मतदान शांतिपूर्ण रहा। कुछ जगहों पर ईवीएम खराबी जैसी मामूली शिकायतें जरूर आईं, लेकिन चुनाव आयोग ने तत्काल कार्रवाई कर मतदान प्रक्रिया सुचारू रखी।
इस बार बिहार चुनाव में कुल 2,616 उम्मीदवार मैदान में थे।
महिला उम्मीदवारों की भागीदारी भी बढ़ी है —
अब पूरा बिहार 14 नवंबर की सुबह से शुरू होने वाली मतगणना पर नजरें गड़ाए हुए है। राजनीतिक दलों ने अपने-अपने मतगणना एजेंटों की नियुक्ति कर दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर एग्जिट पोल्स के अनुमान सही साबित हुए, तो NDA गठबंधन को एक बार फिर सरकार बनाने का मौका मिल सकता है। हालांकि, बिहार की राजनीति में अंतिम वक्त पर समीकरण बदलने की परंपरा रही है।