बिहार की राजनीति में दबंग नेताओं और बाहुबलियों की भूमिका हमेशा से चर्चा में रही है। जेल की सजा काट चुके या विवादित छवि वाले नेता यहां की चुनावी तस्वीर को लगातार प्रभावित करते रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में भी लगभग 12 सीटों पर बाहुबली नेता या उनके परिजन मैदान में हैं।
जेडीयू के बाहुबली नेता अनंत सिंह आगे चल रहे हैं। उनके सामने आरजेडी की वीणा देवी और जन सुराज से पीयूष प्रियदर्शी मुकाबले में हैं।
पूर्व बाहुबली नेता सुनील पांडेय के बेटे विशाल प्रशांत (बीजेपी) बढ़त बनाए हुए हैं। उनकी टक्कर सीपीआई (एम) के मदन सिंह से है।
आरजेडी उम्मीदवार और शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब आगे चल रहे हैं। उनके सामने एनडीए के विकाश कुमार सिंह हैं।
जेडीयू प्रत्याशी और बाहुबली प्रभुनाम सिंह के बेटे रणधीर कुमार सिंह रुझानों में आगे हैं।
बाहुबली अरुण यादव के बेटे दीपू यादव (आरजेडी) और जेडीयू के राधा चरण के बीच कड़ा मुकाबला। रुझानों में दीपू यादव आगे हैं।
आरजेडी के बाहुबली नेता रीतलाल यादव बढ़त बनाए हुए हैं। बीजेपी के रामकृपाल यादव पीछड़े हुए हैं।
यहां दो बाहुबली परिवारों की पत्नियों का आमना-सामना है-
अनिता देवी (आरजेडी) – अशोक महतो की पत्नी
अरुणा देवी (बीजेपी) – अखिलेश सिंह की पत्नी
रुझानों में अरुणा देवी आगे हैं।
बाहुबली क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध इस सीट पर आरजेडी की चांदनी देवी आगे चल रही हैं।
बीजेपी के राकेश रंजन पीछे हैं, जबकि आरजेडी के बाहुबली राहुल तिवारी बढ़त में हैं। यह रुझान बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।
आरजेडी प्रत्याशी और मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला आगे हैं। उनका मुकाबला बीजेपी के संजय कुमार सिंह से है।
यहां कड़ा मुकाबला आरजेडी के बाहुबली विश्वनाथ कुमार सिंह और जेडीयू की मनोरमा देवी के बीच है। रुझानों में मनोरमा देवी बढ़त में।
आरजेडी के बाहुबली कर्णवीर सिंह उर्फ लल्लू मुखिया और बीजेपी के सियाराम सिंह के बीच मुकाबला है। रुझानों में सियाराम सिंह आगे चल रहे हैं।
बिहार की सियासत में बाहुबलियों की पकड़ अभी भी कायम है। 2025 के चुनाव में भी यह साफ दिख रहा है कि चाहे छवि पर विवाद हो या कानूनी मामले-इन नेताओं का जनाधार और जातीय समीकरण उन्हें अब भी चुनावी अखाड़े में मजबूत बनाए हुए हैं।