बिहार बोर्ड रिजल्ट OUT!टायर दुकानदार की बेटी बनी टॉपर, 492 अंक से रचा इतिहास

बिहार बोर्ड 10वीं का रिजल्ट जारी होते ही पूरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई। दोपहर 1:15 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा मंत्री ने परिणाम घोषित किया, जिसमें लाखों छात्रों का इंतजार खत्म हुआ। इस बार रिजल्ट सिर्फ अंकों का खेल नहीं, बल्कि मेहनत और संघर्ष की असली कहानी बनकर सामने आया।
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टायर दुकानदार की बेटी बनी टॉपर, 492 अंक से रचा इतिहास
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    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    बिहार में लाखों छात्रों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। बिहार बोर्ड 10वीं कक्षा का रिजल्ट दोपहर 1:15 बजे जारी कर दिया गया। यह रिजल्ट प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए घोषित किया गया, जहां राज्य के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार और अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र मौजूद रहे। शिक्षा मंत्री ने खुद अपने हाथों से रिजल्ट जारी किया, जिससे छात्रों के चेहरे पर खुशी की चमक साफ नजर आई।

    कब हुई थी परीक्षा, कितने छात्र हुए शामिल?

    इस साल बिहार बोर्ड की 10वीं परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चली। पूरे राज्य में करीब 15 लाख से ज्यादा छात्र (15,12,687) इस परीक्षा में शामिल हुए थे। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा का सफल आयोजन और फिर समय पर रिजल्ट जारी करना, बोर्ड की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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    टायर दुकानदार की बेटी बनी टॉपर

    इस बार का रिजल्ट सिर्फ नंबरों की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष और सपनों की जीत की मिसाल है। सबरिन परवीन ने 492 अंक हासिल कर पूरे बिहार में टॉप किया है।

    सबरिन एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता टायर की दुकान चलाते हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद सबरीन ने अपनी मेहनत से बड़ा मुकाम हासिल किया। तीन बहनों में सबसे बड़ी सबरीन बचपन से ही पढ़ाई में तेज रही हैं। उनका यह सफर बताता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है।

    मैथ्स टीचर की बेटी ने भी किया कमाल

    इस साल टॉपर्स की लिस्ट में एक और नाम खास रहा- पुष्पांजलि, जो सिमुलतला स्कूल की छात्रा हैं।

    पुष्पांजलि ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप किया है। उनके पिता लालमोहन शर्मा एक मैथ्स टीचर हैं और उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में अहम भूमिका निभाई।

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    पुष्पांजलि हमेशा से अपनी क्लास में अव्वल रही हैं। उनकी सफलता यह दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत मिलकर कैसे बड़ा परिणाम देते हैं।

    टॉप-5 में 13 छात्र, टॉप-10 में 139 परीक्षार्थी

    इस साल का रिजल्ट काफी प्रतिस्पर्धी रहा। टॉप-5 में कुल 13 छात्र शामिल हुए हैं। टॉप-10 में 139 परीक्षार्थियों ने जगह बनाई है। यह आंकड़े बताते हैं कि इस बार छात्रों के बीच कड़ी टक्कर रही और कई छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।

    मार्च में ही रिजल्ट जारी

    रिजल्ट जारी करते हुए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य बन गया है, जहां मार्च महीने में ही 10वीं और 12वीं दोनों के रिजल्ट जारी कर दिए गए हैं।

    यह कदम छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए ज्यादा समय मिलेगा और वे अपने करियर की योजना जल्दी बना सकेंगे।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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