
भोपाल के कोलार क्षेत्र में एक अनोखा मंदिर स्थित है, जिसे जीजाबाई माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भक्त माता को फूल, माला या प्रसाद नहीं, बल्कि नए जूते-चप्पल और फ्रॉक चढ़ाते हैं।
पहाड़ी पर स्थित है माता का मंदिर
यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना हुआ है, जहां पहुंचने के लिए लगभग 150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। माता के भवन तक पहुंचने के बाद भक्त माता सिद्धिदात्री के दर्शन करते हैं, जो कन्या रूप में विराजमान हैं।
क्यों चढ़ाए जाते हैं जूते-चप्पल और फ्रॉक?
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि इस मंदिर को ओम प्रकाश गुप्ता ने स्थापित किया था। उन्होंने माता को एक बेटी के रूप में स्थापित किया, इसलिए यहां माता को कन्याओं के वस्त्र, चप्पल और फ्रॉक अर्पित किए जाते हैं।
मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु माता को यह चीजें चढ़ाता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है। खासकर फ्रॉक और चप्पल चढ़ाने से माता जल्दी प्रसन्न होती हैं।
शिव-पार्वती विवाह और कन्यादान की परंपरा
मंदिर के संस्थापक के अनुसार, इस स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह कराया गया था। उस समय मां पार्वती को बेटी मानते हुए उनका कन्यादान किया गया। तभी से माता की सेवा बेटी के रूप में की जाती है और यह अनोखी परंपरा चली आ रही है।
मंदिर में और किन देवी-देवताओं के दर्शन होते हैं?
इस मंदिर में आपको नौ देवियों के साथ-साथ भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंग, एक हजारी शिवलिंग, मां काली, गणेश जी, शनि महाराज और नवग्रहों के दर्शन भी हो जाएंगे।
नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़
नवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। दूर-दराज से लोग माता के चमत्कारों को सुनकर चप्पल और फ्रॉक चढ़ाने के लिए आते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
अगर आप भी भक्ति का एक अनोखा और अद्भुत अनुभव करना चाहते हैं, तो एक बार भोपाल के कोलार क्षेत्र में स्थित इस मंदिर के दर्शन जरूर करें।