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Ovarian Cancer :जल्दी पेट भरना, ब्लोटिंग और अनियमित पीरियड्स... कहीं ये ओवेरियन कैंसर के लक्षण तो नहीं?

ओवेरियन कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाला गंभीर कैंसर है। पेट फूलना, जल्दी पेट भरना, पेल्विक दर्द, बार-बार पेशाब आना और अनियमित पीरियड्स इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। जानिए किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
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जल्दी पेट भरना, ब्लोटिंग और अनियमित पीरियड्स... कहीं ये ओवेरियन कैंसर के लक्षण तो नहीं?

हेल्थ डेस्क। महिलाओं में होने वाले कैंसरों में ओवेरियन कैंसर एक गंभीर और तेजी से बढ़ने वाली बीमारी मानी जाती है। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर मामलों में इसकी पहचान तब होती है, जब कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में ओवेरियन कैंसर के अधिकांश मरीज एडवांस स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

हालांकि लंबे समय तक इसे साइलेंट किलर कहा जाता रहा है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी पूरी तरह खामोश नहीं होती। शरीर पहले ही कई संकेत देता है, लेकिन इनके सामान्य होने की वजह से महिलाएं अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं।

ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण

जानकारी के मुताबिक, ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण मौजूद होते हैं, लेकिन वे इतने सामान्य होते हैं कि अक्सर गैस, अपच, हार्मोनल बदलाव या पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं का हिस्सा समझ लिए जाते हैं। अगर किसी महिला को लगातार पेट फूलने, पेट में भारीपन, जल्दी पेट भरने या पाचन संबंधी दिक्कतों की शिकायत बनी रहती है, तो यह सिर्फ डाइजेशन की समस्या नहीं भी हो सकती। ऐसे लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।

पेट फूलना सबसे बड़ी चेतावनी 

ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षणों में लगातार ब्लोटिंग यानी पेट फूलना सबसे आम माना जाता है। कई महिलाएं बताती हैं कि, कम खाना खाने के बाद भी उन्हें पेट भरा हुआ महसूस होता है। अगर पेट फूलने की समस्या लगातार बनी रहे और इसके साथ पेल्विक एरिया या निचले पेट में दर्द भी हो, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।

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क्या पीरियड्स मिस होना भी हो सकता है संकेत?

हर बार पीरियड्स मिस होना ओवेरियन कैंसर का संकेत नहीं होता। इसके पीछे गर्भावस्था, पीसीओएस (PCOS), थायरॉइड, तनाव, वजन में बदलाव, अत्यधिक व्यायाम या खराब लाइफस्टाइल जैसी कई वजहें हो सकती हैं। लेकिन अगर पहले नियमित रहने वाला मासिक चक्र अचानक कई महीनों तक गड़बड़ा जाए या पीरियड्स लंबे समय तक न आएं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर अगर इसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दें तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

ओवेरियन कैंसर के दौरान शरीर कुछ ऐसे संकेत देता है, जिन्हें अक्सर मामूली समझ लिया जाता है।

प्रमुख लक्षण

  • लगातार पेट फूलना या भारीपन महसूस होना
  • जल्दी पेट भर जाना
  • निचले पेट या पेल्विक एरिया में दर्द
  • बार-बार पेशाब आने की समस्या
  • कब्ज या दस्त जैसी बॉवल हैबिट्स में बदलाव
  • बिना वजह वजन घटना या बढ़ना
  • पीरियड्स का अनियमित होना
  • बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग
  • मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होना
  • असामान्य या बदबूदार वेजाइनल डिस्चार्ज

अगर ये लक्षण लगातार बने रहें या बार-बार लौटकर आएं, तो मेडिकल जांच कराना जरूरी है।

कब हो जाना चाहिए अलर्ट?

अगर कोई लक्षण दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बना रहे या महीने में 12 दिनों से अधिक दिखाई दे, तो उसे सामान्य मानकर टालना नहीं चाहिए। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं और मेनोपॉज के आसपास या उसके बाद की महिलाओं को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस आयु वर्ग में ओवेरियन कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।

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किन महिलाओं में ज्यादा रहता है खतरा?

अगर परिवार में किसी को पहले ओवेरियन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर या कोलन कैंसर रह चुका है, तो जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में आनुवंशिक कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फैमिली हिस्ट्री वाली महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच और स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेते रहना चाहिए।

कैसे होती है ओवेरियन कैंसर की जांच?

ओवेरियन कैंसर की पुष्टि के लिए डॉक्टर कई तरह की जांचें कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-

  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड
  • ब्लड टेस्ट
  • CA-125 ट्यूमर मार्कर टेस्ट
  • सीटी स्कैन या अन्य एडवांस इमेजिंग टेस्ट

हालांकि डॉक्टर बताते हैं कि, CA-125 का बढ़ना हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होता, इसलिए स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

क्या ओवेरियन कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग होती है?

सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर और ब्रेस्ट कैंसर के लिए मैमोग्राफी जैसी नियमित स्क्रीनिंग उपलब्ध हैं, लेकिन ओवेरियन कैंसर के लिए अभी कोई सार्वभौमिक स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं है। यही वजह है कि, जागरूकता और शुरुआती लक्षणों की पहचान ही सबसे बड़ा बचाव माना जाता है।

कैसे कम करें जोखिम?

कुछ अच्छी आदतें अपनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है।

अपनाएं ये हेल्दी आदतें

  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
  • रोजाना शारीरिक गतिविधि और व्यायाम करें।
  • वजन नियंत्रित रखें।
  • तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें।
  • साल में कम से कम एक बार गायनेकोलॉजिकल चेकअप कराएं।
  • फैमिली हिस्ट्री होने पर नियमित स्क्रीनिंग करवाएं।
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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