पत्नी बोली -मुझे रब ने बना दी जोड़ी वाला सुरिंदर नहीं बल्कि राज वाला अवतार चाहिए

पल्लवी वाघेला
भोपाल। पत्नी साड़ी नहीं सूट पहनती है..., पति में वो एक्स फैक्टर नहीं है..., मल्टीनेशनल में काम करने वाले पति की चोटी पसंद नहीं...। कुछ इसी तरह के जुमले भोपाल फैमिली कोर्ट में सुनाई दे रहे हैं। सात वचन के बंधन को तोड़ने के लिए दंपति जिस तरह के तर्क लेकर फैमिली कोर्ट पहुंच रहे हैं उसे देखकर काउंसलर भी हैरान हैं। दंपति जीवनसाथी के रहन-सहन में कमियां निकालकर रिश्ता तोड़ने की कवायद में लगे हुए हैं। हालांकि, काउंसलर का कहना है कि इन मामलों में वाजिब कारण कुछ और होते हैं, लेकिन दंपति कोर्ट में इन बहानों को जस्टिफाई करने में लगे रहते हैं।
साड़ी विवाद में पत्नी मायके पहुंची
राजस्थान निवासी पति से साड़ी पहनने को लेकर हुए विवाद के चलते पत्नी दो साल से भोपाल में है और मेंटेनेंस का केस लगाया है। पत्नी ने कहा कि शादी के पहले ही क्लियर किया था, कि वह सूट पहनने में ज्यादा कंफर्टेबल है। पत्नी का आरोप है कि जबसे उसके पिता के रिटायरमेंट फंड के इंवेस्टमेंट को लेकर उसके भाई और पति में कहासुनी हुई है, तभी से पति को सूट पहनने से दिक्कत होने लगी है, वरना पहले चार साल प्रॉब्लम नहीं हुई।
पति की चोटी बनी परेशानी
साकेत नगर निवासी पति मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत है। पति ने कहा कि वह जब बेंगलुरु में था, तब भी उसने कभी चोटी नहीं कटवाई। शादी के समय भी पत्नी के टोकने पर उसने चोटी कटवाने से मना कर दिया था। मायके में रह रही पत्नी से बात हुई तो उसने कहा कि पति स्मार्ट है, अच्छा कमाता है, लेकिन यह चोटी उसके स्टेटस को मैच नहीं करती है। एक अन्य मामले में दंपति की शादी को 20 साल हो गए हैं। पति की शिकायत है कि पत्नी बन ठन कर नहीं रहती। खासकर डार्क कलर की लिपस्टिक नहीं लगाती, जैसी उसे पसंद है। पत्नी ने कोर्ट में उल्टा पति से पूछा कि क्या मैं कॉलगर्ल हूं जो गृहस्थी को छोड़ लिपस्टिक लगाकर घूमती फिरती रहूं।
पत्नी को नहीं पसंद पति की सादगी
पंजाबी बाग क्षेत्र की पत्नी ने कोर्ट में कहा कि उसे रब ने बना दी जोड़ी का सुरिंदर नहीं बल्कि राज वाला अवतार अपनी जिंदगी में चाहिए। पत्नी के मुताबिक पति फॉर्मल वियर और फीके रंग के कपड़े पहनता। लाख कोशिश पर भी बदला नहीं आया, इसलिए साथ नहीं रहना चाहती। फेमिली कोर्ट के काउन्सलर शैल अवस्थी ने बताया कि दंपति तलाक के लिए कई बार बेतुके कारण बताते हैं और अपने आरोप को काउंसलिंग और कोर्ट में जस्टिफाई करने का प्रयास करते हैं। किसी में संपत्ति, तो किसी में कहीं और अट्रैक्शन जैसे कारण भी सामने आते हैं। कुछ विवाद बेहद मामूली होते हैं, जिनमें सुलह की हर संभव कोशिश की जाती है।












