भोपाल में ई-वेस्ट के निस्तारण पर NGT में सुनवाई, जनस्वास्थ्य को खतरे की शिकायत; 31 अगस्त को अगली सुनवाई

भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक कचरे यानी ई-वेस्ट के कथित अवैज्ञानिक निस्तारण और अनौपचारिक रीसाइक्लिंग से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में मामला पहुंच गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राजधानी में पैदा होने वाले ई-वेस्ट का एक बड़ा हिस्सा अधिकृत व्यवस्था के बजाय अनधिकृत कबाड़ कारोबारियों और अनौपचारिक रीसाइक्लिंग इकाइयों के जरिए निपटाया जा रहा है। NGT ने मामले पर सुनवाई की और अब इसकी अगली सुनवाई 31 अगस्त को भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ में होगी।
भोपाल के पर्यावरणविद् ने दर्ज कराई शिकायत
भोपाल के पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना ने 6 मई को NGT में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में भोपाल में ई-वेस्ट के संग्रहण, प्रसंस्करण और निस्तारण की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और न्यायिक सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने की। शिकायत पर NGT ने अपने अधिकार क्षेत्र के तहत मामले को संज्ञान में लिया।
अनधिकृत तरीके से ई-वेस्ट के निस्तारण का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि भोपाल में रोजाना बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा निकलता है लेकिन इसका केवल सीमित हिस्सा ही वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस और डिस्पोज किया जा रहा है। आरोप है कि बाकी ई-वेस्ट अनधिकृत कबाड़ कारोबारियों और अनौपचारिक रीसाइक्लिंग इकाइयों तक पहुंच रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार ई-वेस्ट को खुले में जलाने या अवैज्ञानिक तरीके से तोड़ने पर सीसा, पारा, कैडमियम और क्रोमियम जैसी हानिकारक धातुओं और पदार्थों का उत्सर्जन हो सकता है। इससे हवा, मिट्टी और भूजल प्रभावित होने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
वायु, मिट्टी और भूजल प्रदूषण का मुद्दा उठाया
आवेदन में भोपाल की वायु गुणवत्ता में गिरावट, मिट्टी और भूजल प्रदूषण तथा ई-वेस्ट से जुड़े संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का मुद्दा उठाया गया है। इसके अलावा शहर में मौजूद कथित अनधिकृत ई-वेस्ट प्रोसेसिंग इकाइयों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है। शिकायत में भोपाल के ई-वेस्ट क्लिनिक के प्रभावी रूप से संचालित नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
जांच समिति बनाने और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित करने की मांग की है। इसके साथ ही अनधिकृत ई-वेस्ट प्रोसेसिंग इकाइयों की पहचान कर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा ई-वेस्ट क्लिनिक को दोबारा प्रभावी तरीके से संचालित करने, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन कर उसकी वसूली करने और अधिक संख्या में संग्रहण केंद्र तथा अधिकृत रीसाइक्लरों की व्यवस्था करने की मांग की गई है। लोगों को ई-वेस्ट के सही निस्तारण के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की बात भी आवेदन में कही गई है।
तकनीकी समस्या के कारण टली सुनवाई
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे, लेकिन उनकी ओर से ऑडियो में तकनीकी समस्या आ गई। इसके कारण NGT की पीठ उनसे प्रभावी तरीके से बातचीत नहीं कर सकी। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की गई।
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अब भोपाल बेंच में होगी सुनवाई
NGT की नई दिल्ली बेंच ने माना कि इस मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार NGT की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल के अंतर्गत आता है। इसलिए मामले को भोपाल बेंच में सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को भोपाल में होगी। इस सुनवाई में भोपाल में ई-वेस्ट के संग्रहण, वैज्ञानिक निस्तारण और कथित अनधिकृत रीसाइक्लिंग से जुड़े मुद्दों पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।












