CM KISAN HELPLINE:किसानों के लिए डिजिटल सिस्टम तैयार, हेल्पलाइन लॉन्च होते ही सीएम ने किसान कॉल सेंटर पर किया संवाद

भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में गुरुवार को भोपाल के रविन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के अलग अलग जिलों से आए 1000 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। इसका मकसद यह था कि किसान से जुड़े सभी विभाग एक साथ काम करें और योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे।
एक साथ जुड़े कई विभाग
इस कार्यशाला की सबसे खास बात यह रही कि इसमें कृषि से जुड़े कई विभागों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई। कृषि, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, बीज निगम और कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ इसमें शामिल हुए। सरकार का मानना है कि जब सभी विभाग मिलकर काम करेंगे, तो किसानों की समस्याओं का समाधान तेजी से होगा और योजनाएं ज्यादा प्रभावी बनेंगी।
किसानों के लिए नई शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान किसानों को ध्यान में रखते हुए तीन नई सुविधाएं शुरू की गईं। इनमें मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, सीएम किसान हेल्पलाइन और पैक्स सदस्यता वृद्धि अभियान शामिल हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य किसानों को एक ही जगह पर जानकारी और सहायता देना है, ताकि उन्हें अलग-अलग कार्यालयों में भटकना न पड़े। इससे समय की बचत होगी और काम भी जल्दी होगा।

मुख्यमंत्री ने खुद किया कॉल सेंटर टेस्ट
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने खुद किसान कॉल सेंटर पर फोन करके इसकी कार्यप्रणाली को जांचा। उन्होंने एक आम किसान की तरह सवाल पूछा और देखा कि जवाब किस तरह दिया जा रहा है। कॉल सेंटर के कर्मचारी ने सही तरीके से जवाब दिया और आगे अधिकारियों द्वारा संपर्क करने की बात कही। इस पहल से यह साफ हुआ कि सरकार नई व्यवस्था को लेकर गंभीर है और उसकी निगरानी भी कर रही है।
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कृषि को लेकर बदलती सोच पर चिंता
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी खेती को करियर के रूप में नहीं देख रही है। ज्यादातर युवा डॉक्टर, इंजीनियर या वकील बनना चाहते हैं। यहां तक कि किसान परिवारों के बच्चे भी खेती से दूर जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह सोच बदलने की जरूरत है और खेती को लाभकारी और सम्मानजनक बनाना होगा।
तकनीक से बदल रही खेती की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब खेती में तेजी से बदलाव आ रहा है। पहले किसान केवल रबी और खरीफ फसलों पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब सिंचाई, बिजली और नई तकनीकों के कारण सालभर खेती करना संभव हो गया है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते खुले हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक को अपनाना अब समय की जरूरत है।
पशुपालन और डेयरी से बढ़ रही आय
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि किसान अब सिर्फ फसल पर निर्भर नहीं हैं। पशुपालन और डेयरी जैसे क्षेत्रों से उनकी आय में अच्छा इजाफा हो रहा है। कई किसान दूध उत्पादन के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और किसानों को आर्थिक सुरक्षा भी मिल रही है।
सभी क्षेत्रों का एक साथ विकास जरूरी
सरकार अब खेती को एक व्यापक रूप में देख रही है। सिर्फ अनाज ही नहीं बल्कि फल, सब्जी, फूल, दलहन, तिलहन, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है। इन सभी को जोड़कर विकास करने की योजना बनाई जा रही है ताकि किसानों की आय के कई स्रोत बन सकें।
सिंचाई योजनाओं पर खास ध्यान
कार्यक्रम में सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। सरकार नदी जोड़ो परियोजनाओं और अन्य योजनाओं के जरिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने पर काम कर रही है। इससे उन इलाकों को भी फायदा मिलेगा, जहां पानी की कमी के कारण खेती मुश्किल होती थी।
कर्मचारियों को भी दिया जा रहा प्रशिक्षण
यह कार्यशाला सिर्फ किसानों के लिए ही नहीं बल्कि सरकारी कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण रही। इसमें उन्हें नई योजनाओं और काम करने के तरीकों के बारे में बताया गया। सरकार का मानना है कि अगर कर्मचारी बेहतर तरीके से प्रशिक्षित होंगे, तो वे किसानों की मदद भी बेहतर ढंग से कर पाएंगे।











