भोपाल :90 डिग्री ब्रिज केस में MP सरकार का बड़ा फैसला, 23 जून 2025 को सस्पेंड हुए 7 इंजीनियर फिर लौटेंगे डयूटी पर

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राजधानी भोपाल के चर्चित 90 डिग्री ब्रिज मामले में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। करीब 11 महीने पहले सस्पेंड किए गए सभी 7 इंजीनियरों को अब बहाल कर दिया गया है। इन अधिकारियों को 23 जून 2025 को कार्रवाई करते हुए निलंबत किया गया था। अब सरकार ने इन्हें दोबारा सेवा में लौटने की अनुमति दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर 90 डिग्री ब्रिज मामला चर्चा में आ गया है। यह वही मामला है जिसने भोपाल समेत पूरे प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और इंजीनियरिंग सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे। ब्रिज के अजीब एंगल को लेकर उस समय सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक जमकर विवाद हुआ था।
मंत्री राकेश सिंह ने दी बहाली को मंजूरी
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने इंजीनियरों की बहाली को मंजूरी दी। बहाल किए गए सभी अधिकारियों को अब प्रमुख अभियंता कार्यालय यानी ईएनसी ऑफिस में पदस्थ किया जाएगा। हालांकि सरकार ने कहा है कि सभी अधिकारियों को पूरी तरह क्लीन चिट नहीं दी गई है। इनमें से कुछ इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय जांच अभी भी जारी रहेगी।
तीन इंजीनियरों पर जारी रहेगी विभागीय जांच
जानकारी के अनुसार, पीडब्ल्यूडी के ब्रिज डिवीजन से जुड़े तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, अनुविभागीय अधिकारी रवि शुक्ला और उपयंत्री उमाशंकर मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी। इन अधिकारियों पर निर्माण कार्य में तकनीकी लापरवाही और गंभीर त्रुटियों के आरोप हैं। विभाग अब इनसे जुड़े दस्तावेज, तकनीकी रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की जांच करेगा। बताया जा रहा है कि जांच अधिकारी जल्द नियुक्त किए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया में चार से पांच महीने का समय लग सकता है।
तीन अधिकारियों को बिना जांच मिली बहाली
वहीं डिजाइन विंग से जुड़े प्रभारी चीफ इंजीनियर संजय खांडे, प्रभारी ईई शबाना रज्जाक और सहायक यंत्री शानुल सक्सेना को बिना विभागीय जांच के बहाल किया गया है। विभाग का कहना है कि इन अधिकारियों ने आरोप पत्र के जवाब में डिजाइन संबंधी गलती से इनकार किया था। बाद में तकनीकी परीक्षण में उनकी बात को आधार माना गया।
जांच में क्या सामने आया?
90 डिग्री ब्रिज मामले की जांच के दौरान कई तकनीकी खामियां सामने आई थीं। तीन वरिष्ठ इंजीनियरों की जांच में पाया कि ब्रिज का वास्तविक एंगल 90 डिग्री नहीं बल्कि करीब 119 डिग्री था। रिपोर्ट में कहा गया कि जगह की कमी के कारण अधिकतम संभव एंगल रखा गया था, लेकिन निर्माण के दौरान दोनों तरफ के स्लैब को सीधी लाइन में जोड़ने से सही कर्व नहीं बन पाया। जांच में यह भी सामने आया कि यदि निर्माण के दौरान अधिकारियों ने समय रहते सुपरविजन और तकनीकी निर्णय लिए होते तो डिजाइन में सुधार संभव था। साथ ही रेलवे क्षेत्र में सर्कुलर पिलर की जगह वाल टाइप पिलर बनाए गए, जिसे भी गंभीर त्रुटि माना गया।
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किस इंजीनियर पर क्या आरोप था
जांच के दौरान अलग-अलग अधिकारियों पर अलग-अलग आरोप लगाए गए थे। शबाना रज्जाक और शानुल सक्सेना पर रेलवे की अनुमति के बिना ड्राइंग मंजूर करने का आरोप लगा था। वहीं संजय खांडे पर गलत डिजाइन को मंजूरी देने की बात कही गई थी। उमाशंकर मिश्रा और रवि शुक्ला पर बिना रेलवे अनुमति निर्माण कार्य कराने का आरोप था। जबकि जीपी वर्मा पर आरओबी निर्माण में त्रुटिपूर्ण कार्यवाही कराने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा रिटायर्ड ईई जावेद शकील और एमपी सिंह पर भी डिजाइन और निर्माण से जुड़ी लापरवाही के आरोप लगे थे।
सोशल मीडिया पर बना था बड़ा मुद्दा
90 डिग्री ब्रिज का मामला सामने आने के बाद यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। ब्रिज के तीखे मोड़ को लेकर लोगों ने सवाल उठाए थे कि आखिर ऐसा डिजाइन कैसे पास हुआ। विपक्ष ने भी सरकार को घेरते हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए थे। विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सात इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया था। अब लगभग 11 महीने बाद उनकी बहाली का फैसला लिया गया है।












