इंदौर।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के पीछे की एक और बड़ी वजह अब सामने आ गई है। जांच में खुलासा हुआ है कि नर्मदा लाइन में मिल रहा बोरिंग का पानी खुद गंभीर रूप से दूषित था और उसी ने पूरे क्षेत्र में सप्लाई होने वाले पानी को ज़हरीला बना दिया।
बोरिंग के पानी की जांच रिपोर्ट में मल-मूत्र जनित खतरनाक बैक्टीरिया फीकल कोलीफार्म पाए गए हैं। यह वही बैक्टीरिया है, जो हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और डायरिया जैसी जानलेवा बीमारियों का प्रमुख कारण बनता है। मानकों के अनुसार पानी में फीकल कोलीफार्म की मात्रा शून्य (0 प्रतिशत) होनी चाहिए, लेकिन जांच में यह सीमा कई गुना अधिक पाई गई।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्र के 60 बोरिंग के पानी के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 35 सैंपल पूरी तरह फेल निकले। कुछ बोरिंग के पानी में फीकल कोलीफार्म की मात्रा 84 तक पाई गई, जबकि कुछ सैंपलों में यह आंकड़ा 350 के पार पहुंच गया, जो सीधे तौर पर गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि क्षेत्र के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला के वार्ड की बोरिंग भी दूषित पाई गई है। इससे साफ हो गया है कि समस्या किसी एक गली या मोहल्ले तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भागीरथपुरा क्षेत्र में फैली हुई है।
भागीरथपुरा में फिलहाल 500 से अधिक सरकारी और निजी बोरिंग सक्रिय हैं। इनमें से कई बोरिंग का पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के नर्मदा लाइन में मिल रहा था, जिससे शुद्ध नर्मदा जल भी दूषित हो गया। यही वजह मानी जा रही है कि बड़ी संख्या में लोग उल्टी-दस्त, डायरिया और संक्रमण की चपेट में आए और कई की जान तक चली गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि फीकल कोलीफार्म की मौजूदगी यह साफ बताती है कि पानी में सीवेज या मल-मूत्र का मिश्रण हो रहा है। ऐसे पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने या घरेलू कामों में करना सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो सकता है।
अब सवाल यह है कि जब मानकों के मुताबिक बोरिंग के पानी की नियमित जांच जरूरी है, तो इतने लंबे समय तक यह लापरवाही कैसे चलती रही? किसकी अनुमति से दूषित बोरिंग का पानी नर्मदा लाइन में मिलाया गया? और आखिर इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
भागीरथपुरा में सामने आए इस खुलासे ने प्रशासन, नगर निगम और जलप्रदाय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। रिपोर्ट 00 हेमंत